पश्चिमी सिंहभूमः पत्थर खदान बन्द होने से विकास कार्यो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है,समय पर कोई कार्य नहीं किया जाना, भ्रष्टाचार का घोटाला माना जाता है

 पश्चिमी सिंहभूमः पत्थर खदान बन्द होने से विकास कार्यो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है,समय पर कोई कार्य नहीं किया जाना, भ्रष्टाचार का घोटाला माना जाता है



बालू घाट की कमी और नीलामी  नहीं होने के कारण विकास कार्य समय पर पूरा नहीं किया जा सकता 

राशि विमुक्ति समय पर नहीं होने के कारण संवेदक लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है

निविदा का निष्पादन समय पर नहीं किए जाने के कारण संवेदक लोगों को बैंक का ब्याज भरना भारी पड़ रहा है

जिला परिषद में समय पर संवेदक को कार्यादेश नहीं दिए जाने का मामला गम्भीर रूप ले सकता है

बालू और पत्थर का चलान की खोज में संवेदक हो रहे हैं परेशान

संतोष वर्मा

Chaibasaः जिला में असैनिक कार्य यानी विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गया है. संवेदक सूत्रों के अनुसार पहला कारण यह बताया गया है कि, जिला प्रशासन से समय पर राशि विमुक्ति नहीं होना, दूसरा कारण यह है कि पत्थर खदान का लीज खत्म होने के कारण पर्याप्त मात्रा में गिट्टी और बोल्डर नहीं मिलना, तीसरा कारण अन्य पत्थर खदान के मालिकों के द्वारा दर बढ़ाने के कारण,प्राक्कलन का संशोधन नहीं किया जाना बताया जा रहा है. सबसे बड़ा कारण यह भी बताया गया है कि राशि विमुक्ति के लिए प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों से समय पर भौतिक सत्यापन में विलम्ब किया जाना और प्राक्कलन राशि का एक पर्सेन्ट कमिशन की मांग किया जाना. और एक बड़ी बात यह बताई गई है कि जिला के प्रभारी विकास पदाधिकारी सबिता टोप्पनो के द्वारा संचिका का निष्पादन समय पर नहीं किया जाना, और एजेंसिय को अप्रत्यक्ष रूप से प्रताड़ित करना, यह भी अन्य सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई है कि जिला परिषद में भी संवेदक को समय पर कार्यादेश नहीं दिया जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बालू घाट की कमी से विकास योजनाओं का कार्य पूरी तरह से बाधित हो गया है, लेकिन इन सारी समस्याओं पर कौन बोलेगा, और कौन इसका समाधान करेगा. मात्र संवेदक को ही सब झेलना पड़ेगा. यही संवेदक है, जो विकास की निर्माण में मुख्य भूमिका निभाते हैं,जिस ओर सरकार और प्रशासन का कोई ध्यान नहीं रहता है. आज संवेदक अपने आप को शोषित महसूस कर रहे हैं. कोई इनका दुख दर्द को नहीं समझता है. बेरोजगारी के दौर में संवेदक अपने परिवार को पालने के लिए वर्तमान समय में जंग लड़ रहे हैं, आज समय पर निविदा निष्पादन नहीं हो रहा है, जिसके कारण संवेदक को EMD की राशि का अनावश्यक रूप से बैंक को ब्याज भरने पर बाध्य होना पड़ रहा है. सरकार या प्रशासन को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि समय पर कोई कार्य नहीं किया जाना, भ्रष्टाचार का घोटाला माना जाता है.

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