एनजीटी को ठेंगा... नदी का सीना चीर रहे बालू माफिया..सड़कों पर सरपट दौड़ रही है बालू लदे ट्रैक्टर, बालू से निकल रहा है तेल, बालू चोरों को मिल रहा है संरक्षण
तांतनगर क्षेत्र के नदी घाटों से अवैध बालू खनन व परिवहन बदस्तूर जारी... गोइलकेरा, मनोहरपुर, सोनुवा, चक्रधरपुर, चाईबासा आदि में धड़ल्ले से हो रहा है बालू का काला कारोबार
संतोष वर्मा
Chaibasa : एनजीटी के आदेश की धरातल पर किस कदर धज्जियां उड़ाते हुए बालू माफिया नदी का सीना चीर रहे है, इसका उदाहरण पश्चिम सिंहभूम जिले के तांतनगर अंचल में देखने को मिल रहा है। मानसून को देखते हुए 10 जून से नदियों से बालू उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो चुका है। इसके बावजूद खरकई नदी के कई घाटों पर बालू माफिया बेखौफ सक्रिय हैं। तांतनगर प्रखंड क्षेत्र के संगम, इलीगाड़ा, सिदमा, चिट्ठीमिट्टी, डोबरोबासा-सासे समेत अन्य नदी घाट में अवैध बालू उत्खनन का कार्य धड़ल्ले से चलता देखा गया। ट्रैक्टरों में बालू की लोडिंग करते लोग दिखे। इस प्रकार डीसी के निर्देशों के बावजूद अवैध खनन, भंडारण और परिवहन जारी रहने से जिला खनन विभाग समेत अंचल कार्यालय और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
* टॉस्क फोर्स भी रोक लगा पाने में अक्षम साबित हो रहा :
राज्य भर में 10 जून से 15 अक्टूबर तक जिले की सभी नदियाें से बालू उठाव पर एनजीटी की रोक है। लेकिन क्षेत्र में बालू खनन व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तांतनगर क्षेत्र के संगम, इलीगाड़ा, सिदमा, चिट्ठीमिट्टी, डोबरोबासा-सासे नदी समेत अन्य नदी घाट में अवैध बालू उत्खनन का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है।
बता दें कि मॉनसून को लेकर यह आदेश हर साल जिला प्रशासन को दिया जाता है। लेकिन जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड क्षेत्र में लगातार नदियों से अवैध रूप से बालू का उठाव लगातार किया जा रहा है। ट्रैक्टर मालिकों और चालकों का गिरोह बेखौफ होकर दिन रात तांतनगर प्रखंड के विभिन्न नदी घाटों से प्रत्येक दिन ट्रैक्टरों से बालू का उठाव किया जा रहा है। जिस पर टॉस्क फोर्स भी रोक लगा पाने में अक्षम साबित हो रहा है। लोगों का कहना है कि खनन विभाग की टीम के निकलने के पहले ही बालू तस्करों को इसकी जानकारी मिल जाती है। इसके बाद वे नदी से ट्रैक्टर को हटवा लेते हैं।
* राहगीर रहते हैं परेशान :
तांतनगर-चाईबासा मुख्य सड़क पर चलने वाले लोग सुबह से ही ट्रैक्टर की आवाजाही से परेशान हैं। नदी घाट से मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए कई गांव से होकर ट्रैक्टर को गुजरना पड़ता है। सुबह से ही ट्रैक्टर आने-जाने के कारण गांव वासी काफी परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र की सड़के पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क जर्जर होने के कारण आने-जाने में गांव के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि सुबह से ही बालू ढोने के लिए ट्रैक्टर का आना-जाना शुरू हो जाता है। यह सिलसिला दिन भर चालू रहता है।
* संयुक्त छापामारी नहीं होती है :
जिला खनन टॉस्क फोर्स की बैठक प्रत्येक माह होती है। जिसमें उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले में अवैध खनन और परिवहन नहीं होने का निर्देश दिया जाता है। लेकिन इस निर्देश का पालन नहीं हो पाता है जिसके कारण बालू का अवैध कारोबार करनेवालों का हौसला बुलंद है। बैठक में सभी थाना प्रभारी और सीओ को संयुक्त रूप से छापामारी करने का निर्देश मिलता है। लेकिन आज तक कभी भी संयुक्त रूप से छापेमारी नही हो सकी है।
