संयुक्त यूनियन का आंदोलन रंग लाया, फिलहाल टली बायोमेट्रिक व्यवस्था

 संयुक्त यूनियन का आंदोलन रंग लाया, फिलहाल टली बायोमेट्रिक व्यवस्था



रात 7 बजे की वार्ता में बनी सहमति, कोर्ट के अंतिम निर्णय तक पुरानी हाजिरी व्यवस्था रहेगी जारी



संतोष वर्मा

Chaibasa ः सेल की लौह अयस्क खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर चल रहा श्रमिक आंदोलन सोमवार देर शाम सकारात्मक मोड़ पर पहुंच गया। रात करीब 7 बजे प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियनों के बीच हुई अहम बैठक के बाद प्रबंधन ने फिलहाल बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू नहीं करने पर सहमति जता दी। तय हुआ कि जब तक बायोमेट्रिक प्रणाली से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सेल की खदानों में पुरानी हाजिरी व्यवस्था ही जारी रहेगी। प्रबंधन की ओर से यह आश्वासन मिलने के बाद संयुक्त यूनियनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही रात्रि पाली से सभी श्रमिक अपने-अपने कार्यस्थलों के लिए खदान क्षेत्र की ओर रवाना हो गए और कामकाज सामान्य होने लगा। इससे पहले सोमवार को गुवा स्थित एचआरडी भवन में प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी, लेकिन प्रारंभिक चरण में कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल रहने पर संयुक्त यूनियनों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए स्पष्ट कहा था कि न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू नहीं होने दी जाएगी। बैठक में किरीबुरू के एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो भी उपस्थित रहे। उन्होंने सभी पक्षों से न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करते हुए आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। यूनियन नेताओं ने कहा कि वे न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन मामला मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए अंतिम आदेश आने तक पुरानी पंचिंग कार्ड एवं हाजिरी व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। उनका आरोप था कि प्रबंधन ने बिना सहमति के कर्मचारियों पर बायोमेट्रिक प्रणाली थोपने का प्रयास किया। गौरतलब है कि सोमवार की पहली पाली से किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों में हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने से इनकार कर दिया था, जिससे उत्पादन, लोडिंग और परिवहन कार्य प्रभावित हुए। हालांकि देर शाम बनी सहमति के बाद फिलहाल विवाद शांत हो गया है और सभी की निगाहें अब न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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