चाईबासा/संतोष वर्मा: गुवा सेल खदान से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 500 स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया गया है तथा 72 युवकों को हटाने के बाद पुनः काम पर नहीं लिया गया। इसके विरोध में 13/02/2026 को धरना-प्रदर्शन कर पहला ज्ञापन सौंपा गया तथा 27/02/2026 को पुनः 4 घंटे का धरना देकर दोबारा मांगें रखी गईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद निर्णय के अनुसार 15/04/2026 से 17/04/2026 तक भूख हड़ताल की गई। जब इसके बाद भी प्रबंधन ने सकारात्मक पहल नहीं की, तो 20 अप्रैल को गुवा सेल जनरल ऑफिस के सामने अनिश्चितकालीन चक्का जाम किया गया। इस दौरान प्रशासन और सेल प्रबंधन द्वारा वार्ता के लिए आमंत्रित करने का आश्वासन दिया गया, जिसके आधार पर आंदोलन को अस्थायी रूप से समाप्त किया गया।
उक्त आश्वासन के क्रम में मंगलवार को सेल प्रबंधन द्वारा वार्ता के लिए बुलाया गया, जिसमें ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में भाग लिया। वार्ता में रोजगार, विस्थापन और प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान से निकलने वाले कचरे और प्रदूषण के कारण जमीन बंजर हो रही है, जल स्रोत दूषित हो रहे हैं और पशु-पक्षियों के साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
हालांकि, इस वार्ता में भी सेल प्रबंधन ने ग्रामीणों की मांगों को मानने से इंकार कर दिया, जिससे भारी असंतोष व्याप्त है। वार्ता में मांगता सोरेन, सुरेश चाम्पिया, सारंडा पीठ मानकी, ग्रामीण मुंडा गन मंगल पुर्ति,डुरसु चंपिया, गोकुल देवगम, निर्मल पूर्ति, सिंगा सुरीन, दामू चंपिया, कानुराम देवगम, बिरसा सुरीन एवं मनचुइया सिंकू सहित कई ग्रामीण प्रतिनिधि और हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल थे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अब वे पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
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