चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से त्वचा रोग मेलास्मा के सफल उपचार का प्रेरणादायक मामला सामने आया है। नोआमुंडी प्रखंड के सोनापोष पंचायत निवासी एवं वीएलई के रूप में कार्यरत श्रीमती विनिता ने आयुर्वेदिक उपचार से अपने चेहरे पर लंबे समय से मौजूद झाइयों से राहत पाई है।
जानकारी के अनुसार करीब छह से सात माह पूर्व श्रीमती विनिता के चेहरे पर काले और भूरे रंग के धब्बे उभरने लगे थे। धीरे-धीरे यह समस्या दोनों गालों और कपार तक फैल गई, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसी दौरान सोनापोष पंचायत भवन में आयोजित आयुष स्वास्थ्य शिविर में उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श लिया।
आयुष चिकित्सक डॉ. कविता मैथी ने बताया कि मेलास्मा एक सामान्य त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा पर काले, भूरे या नीले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। यह समस्या प्रायः तेज धूप और हार्मोन असंतुलन के कारण बढ़ती है। जांच के बाद मरीज को आयुर्वेदिक औषधियों के साथ जीवनशैली में सुधार संबंधी सलाह दी गई।
उपचार के दौरान आरोग्यवर्धिनी वटी, कुमार्यासव सिरप एवं विभिन्न आयुर्वेदिक चूर्णों का नियमित सेवन कराया गया। मरीज द्वारा चिकित्सकीय परामर्श और परहेज का पालन करने के बाद लगभग छह माह में चेहरे के धब्बों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। धीरे-धीरे त्वचा सामान्य स्थिति में आने लगी और रोग में काफी राहत मिली।
उपचार से संतुष्ट श्रीमती विनिता ने कहा कि आयुष चिकित्सा से उन्हें न केवल शारीरिक लाभ मिला, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी वापस लौटा है। उन्होंने लोगों से समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और आयुष पद्धति पर भरोसा रखने की अपील की।
जिला आयुष विभाग ने कहा कि आयुर्वेद सहित अन्य आयुष पद्धतियां कई दीर्घकालिक बीमारियों के प्रबंधन में प्रभावी साबित हो रही हैं। विभाग द्वारा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आयुष सेवाओं का लाभ लेने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।
