Chaibasa News: चाईबासा में बिना नंबर प्‍लेट के 40 नई बोलेरो व 47 मोटरसाइकिलें सड़कों पर दौड़ रही है बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के

आम जनता में आक्रोश है, आम जनता ने कानून के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल!

पुलिस प्रशासन ने जल्द रजिस्ट्रेशन का दिया आश्वासन!


Chaibasa/santosh verma: झारखंड में अपराध नियंत्रण को लेकर भले ही चमचमाती बेलोरो व मोटरसाईकिलें बड़े पैमाने पर आवंटन की है लेकिन उन गाड़ियों का अबतक पंजिकरण और नंबर आवंटन नहीं किए जाने से आम लोगों के जुवान पर कई सवाल उठने लगें है.ऐसी ही बानगी पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में इन दिनों पुलिसग महकमे की नई गाड़ियां आम जनता के बीच चर्चा, असमंजस और तीखे सवालों का विषय बनी हुई हैं। मामला सीधे तौर पर कानून और नियमों के दोहरे मापदंड से जुड़ा हुआ है। 
 
राज्य सरकार द्वारा पुलिस गश्त और आपातकालीन सेवाओं को हाईटेक करने के उद्देश्य से इसी वर्ष मार्च में चाईबासा पुलिस को चमचमाती नई बोलेरो गाड़ियां और टीवीएस अपाचे मोटरसाइकिलें सौंपी गई थीं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आवंटन के महीनों बाद भी ये वीआईपी वाहन बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर और बिना नंबर प्लेट के ही सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं। 
 
मार्च में मिली थीं 40 बोलेरो और 47 मोटरसाइकिलें  

उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार ने राज्यभर के थानों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) यानी 'डायल 112' सेवा और पुलिस पेट्रोलिंग को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वाहनों का वितरण किया था। इसी के तहत चाईबासा जिला पुलिस को भी 40 नई बोलेरो गाड़ियां और 47 अपाचे मोटरसाइकिलें उपलब्ध कराई गई थीं। 
 
इन वाहनों के जरिए सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लगातार गश्त (पेट्रोलिंग) भी की जा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद सराहनीय है। मगर, इन गाड़ियों पर नंबर प्लेट का न होना अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 
 
जनता का सुलगता सवाल: नियम सबके लिए बराबर क्यों नहीं? 

जिले के विभिन्न मुख्य मार्गों और चौराहों पर बिना नंबर प्लेट की पुलिस गाड़ियों को देखकर आम नागरिकों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि देश और राज्य का परिवहन कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए। 
 
जब कोई आम नागरिक शोरूम से नई गाड़ी निकालता है और बिना नंबर प्लेट या बिना अस्थायी नंबर (Temporary Number) के सड़क पर चलता है, तो ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग तत्काल मुस्तैदी दिखाते हुए भारी-भरकम चालान काट देता है। कई बार तो गाड़ियां तक जब्त कर ली जाती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस खुद बिना नंबर के वाहन कैसे चला सकती है? क्या सरकारी महकमे के लिए मोटर वाहन अधिनियम लागू नहीं होता?
 
रात के समय बढ़ जाता है संदेह, पहचान करना नामुमकिन

जानकारों का कहना है कि सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था के लिहाज से हर सरकारी वाहन पर स्पष्ट नंबर अंकित होना अनिवार्य है। खासकर रात के समय जब ये बिना नंबर वाली गाड़ियां सायरन बजाते हुए या बिना सायरन के पेट्रोलिंग करती हैं, तो कई बार लोग असमंजस और संदेह की स्थिति में आ जाते हैं। 
 
नागरिकों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि भगवान न करे, इन वाहनों से सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए या किसी घटना के वक्त आम आदमी को शिकायत दर्ज कराने के लिए गाड़ी की पहचान करनी पड़े, तो बिना नंबर के उसकी शिनाख्त कैसे संभव होगी? 
 
इंटरनेट मीडिया पर तस्वीरें वायरल, परिवहन नियमों की अनदेखी 

  इस बीच, सोशल मीडिया (इंटरनेट मीडिया) पर भी बिना नंबर प्लेट वाली इन चमचमाती पुलिस बोलेरो और बाइकों की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। नेटिजन्स इसे नियमों का खुला उल्लंघन और दोहरा मापदंड बताकर पुलिस प्रशासन को ट्रोल कर रहे हैं। परिवहन नियमों के विशेषज्ञों के अनुसार, नई गाड़ियों के आवंटन के बाद स्थायी नंबर आने में यदि समय लग रहा है, तब भी गाड़ियों पर अस्थायी नंबर (Temp Number) या 'ट्रेड सर्टिफिकेट' (TC Number) को प्रदर्शित करना कानूनी रूप से अनिवार्य माना जाता है। पुलिस विभाग द्वारा इस बुनियादी नियम की अनदेखी की जा रही है। 
 
जल्द जारी होगा स्थायी रजिस्ट्रेशन: पुलिस प्रशासन

इस पूरे मामले पर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये सभी वाहन सीधे सरकारी प्रक्रिया और केंद्रीय खरीद के तहत विभाग को उपलब्ध कराए गए हैं। कागजी औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और जल्द ही सभी 40 बोलेरो व 47 बाइकों का स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर दिया जाएगा। 
 
अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि ये गाड़ियां सीधे जनता की सुरक्षा और आपातकालीन आपात स्थितियों (डायल 112) से जुड़ी हुई हैं, इसलिए इन्हें तुरंत सेवा में उतारना जरूरी था। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस विसंगति को कब तक दूर करता है।

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