ग्रामीण कार्य विभागः नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी फर्जी शिकायत पत्र बताने वाले अभियंताओं की हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच करा सकते हैंःराजनीतिक सुत्र

 ग्रामीण कार्य विभागः नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी फर्जी शिकायत पत्र बताने वाले अभियंताओं की हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच करा सकते हैंःराजनीतिक सुत्र



सरवन कुमार के भ्रष्टाचार का मामला केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर विचार कर रही है भाजपा

ग्रामीण कार्य विभाग के भ्रष्टाचार कार्यशैली से हेमन्त सोरेन सरकार की छवि खराब हो रही हैः झामुमो सुत्र



कांग्रेस पार्टी अपने ही मंत्री दीपक पांडेय सिंह के खिलाफ गोलबंद हो रहे हैं?

राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के दो मंत्री का बदलना तय माना जा रहा 

जूनियर को सीनियर बनाने के मामलेज में माननीय उच्च न्यायालय का बड़ा आदेश


santosh verma

Chaibasaःझारखण्ड सरकार में ग्रामीण कार्य विभाग के भ्रष्टाचार की चर्चा राज्य से लेकर दिल्ली के गलियारे तक पहुंच चुकी है। हां ग्रामीण कार्य विभाग का यह मामला कोई नया नहीं है, विपक्ष के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी के द्वारा आवाज उठाने से पहले कांग्रेस पार्टी के ही कई विधायक ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और उनके नजदीकी बबलू मिश्रा उर्फ मामा जी के खिलाफ मुखर हो कर पार्टी आलाकमान से शिकायत दर्ज करा चुके हैं। हाल के दिनों में ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय के दस अभियंताओं के द्वारा बबलूझ मिश्रा के खिलाफ लिखत शिकायत दर्ज कराए जाने का मामला सामने आया था, इस मामले को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को शिकायत पत्र के आधार पर घटना की जांच कराने कीझ मांग की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार फिर सभी दस अभियंताओं ने मंत्रालय के भारी दबाव में यू टर्न लेते हुए सरवन कुमार के द्वारा मैनेज करने और अपने ही शिकायत पत्र से इनकार किए जाने का पत्र पुनः लिखा जाना संदेह एवं जांच के कटघरे पर ग्रामीणझझ कार्य विभाग के दस अभियंताओं आ गए हैं। वहीं मुख्य अभियंता सरवन कुमार के कार्यकाल में हुए टेंडर घोटाला, टेंडर मैनेज,  कमिशन वसूली का तार मंत्री दीपक पांडेय सिंह के नजदीकी बबलू मिश्रा उर्फ मामा जी के कॉल डिटेल एवं फेस टाईम पर सरवन कुमार के आलावा सभी कार्यपालक अभियंता से बात किए जाने की जांच करने पर विपक्ष के द्वारा केंद्रीय एजेंसी को लिखने वाले हैं। पूर्व में भी हटिया विधायक के द्वारा मुख्य अभियंता सरवन कुमार के कार्यालय का घेराव एवं जनता के साथ प्रदर्शन कर चुके हैं। ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा टेंडर मैनेज करने के लिए गलत ढंग से नियम विरुद्ध तरीके से मंत्री ने मौखिक आदेश पर टेंडर निष्पादन पर रोक लगा दिया था, जिसपर विधान सभा में आवाज तक उठ चुकी है। मालूम हो कि एक साल से अधिक समय तक टेंडर प्रक्रिया को जानबूझ कर लटका कर रखा गया, बीड वैलिडिटी समाप्त होने के बाद पुनः सभी कार्यपालक अभियंता संवेदकों से बीड वैलिडिटी बढ़ाने से संबंधित आवेदन लिया है, सभी घटना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। आज ग्रामीण कार्य विभाग के काले कारनामे एवं भ्रष्टाचार कार्यशैली से हेमन्त सोरेन की सरकार बदनामी हो रही है। सूत्रों के अनुसार हेमन्त सोरेन ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री और उनके सभी विभागों पर नज़र रखे हुए हैं, राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के दो मंत्री का बदलना तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी जल्द ही ग्रामीण कार्य विभाग में योग्य संवेदकों को अयोग्य ठहराकर तकनीकी रूप से रिजेक्ट किया गया है, उसकी जांच कराने पर गंभीर हैं। वहीं फर्जी शिकायत पत्र की फोरेंसिक जांच कराने एवं विधानसभा की याचिका समिति को इसकी जांच के लिए लिखे जाने की चर्चा है। अब कई बिन्दु पर ग्रामीण कार्य विभाग के कारनामे अपने ही बुने जाल में फंसते नज़र आ रहे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही ग्रामीण कार्य विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने में लगे हुए हैं। पूर्व में भी ग्रामीण कार्य विभाग भ्रटाचार के मामले में मुख्य अभियंता बिरेंद्र राम जेल जा चुके हैं, दूसरी पारी में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और संजीव कुमार लाल आज तक जेल की हवा खा रहे हैं,अब तीसरी पारी में ग्रामीण कार्य विभाग के कितने और कौन लोग पर गाज गिर सकती है, यह बहुत ही जल्द सामने आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। संवेदक सूत्रों के के अनुसार सरवन कुमार को जूनियर से सीनियर पद पर बैठा कर भ्रष्टाचार का खेल को अंजाम दिया जा रहा है। इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश भी दिया है। इस समाचार के साथ आदेश की प्रति भी प्रकाशित की जा रही है।

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