चाईबासा/संतोष वर्मा: यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत माहवारी स्वच्छता प्रबंधन विषय पर मास्टर प्रशिक्षकों का जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम समाहरणालय सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती स्वेता भारती ने दीप प्रज्वलित कर किया।
प्रशिक्षण के दौरान माहवारी से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, स्वास्थ्य सेवाओं एवं सुविधाओं की उपलब्धता, सेनेटरी उत्पादों की पहुंच और उपयोग किए गए सेनेटरी उत्पादों के सुरक्षित निपटान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस अवसर पर समूह कार्य एवं प्रतिभागियों द्वारा अनुभव साझा करने की गतिविधियां भी आयोजित हुईं।
सदर अस्पताल की डॉ. रश्मि ने कहा कि किशोरियों को प्रारंभिक अवस्था से ही माहवारी के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि अचानक माहवारी शुरू होने पर भय और असमंजस की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार का माहवारी पर सीधा प्रभाव पड़ता है तथा स्वच्छता की कमी से सर्वाइकल कैंसर और बांझपन जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने उपयोग किए गए सेनेटरी नेपकिन के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान पर विशेष जोर देते हुए महिलाओं को मेनार्की के साथ-साथ मेनोपॉज के प्रति भी जागरूक रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम में चक्रधरपुर की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि, सभी महिला पर्यवेक्षिकाएं, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की राज्य परामर्शी श्रेया त्रिपाठी सहित यूनिसेफ, पीरामल फाउंडेशन, पीसीआई, लीड तथा जिला समाज कल्याण विभाग के कर्मियों ने भाग लिया।
