Chaibasa News: “मोबाइल की रोशनी में प्रसव, स्वास्थ्य विभाग और सरकार की संवेदनहीनता से मां-बच्चे की मौत”- गीता कोड़ा


चाईबासा/संतोष वर्मा: राजनगर सीएचसी में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराए जाने के दौरान एक स्वास्थ्य सहिया महिला और उसके नवजात शिशु की मौत ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। परिजनों के अनुसार अस्पताल में बिजली तक की व्यवस्था नहीं थी और मोबाइल/मोमबत्ती की रोशनी में ऑपरेशन जैसा गंभीर कार्य किया जा रहा था। यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की निर्ममता और प्रशासनिक विफलता का भयावह उदाहरण है।

इस मामले पर झारखंड भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब एक स्वास्थ्य सहिया, जो खुद व्यवस्था का हिस्सा है, वह भी सुरक्षित नहीं है, तो आम गरीब और आदिवासी परिवारों की स्थिति कितनी दयनीय होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल और असंवेदनशील साबित हो चुकी है।

गीता कोड़ा ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनका रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। सवाल पूछने पर जवाब देने के बजाय पत्रकारों को धमकाया और डराया जाता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि इस सरकार को गरीब और आदिवासी समाज के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी और पीएचसी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है—न बिजली, न डॉक्टर, न दवाइयां। चाईबासा और चक्रधरपुर में बच्चों के शव झोले और डब्बे में देने जैसी घटनाएं पहले ही इंसानियत को शर्मसार कर चुकी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ब्लड बैंक की अनुमति वर्षों से लंबित है, मरीज दर-दर भटक रहे हैं और एचआईवी पीड़ित बच्चों को आज तक न्याय नहीं मिला। सरकार ने जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

गीता कोड़ा ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और स्वास्थ्य मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि अब जनता इस विफल और असंवेदनशील व्यवस्था को बर्दाश्त करने वाली नहीं है।

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