वीर शाहिद गंगाराम कालुंडिया की शहादत संघ को ईचा डैम रद्द करने की प्रेरणा प्रदान करती है - बीर सिंह बिरुली
संतोष वर्मा
Chaibasaःईचा खरकई बांध विरोधी संघ कोल्हान ने 44वाँ वीर शाहिद नायब सूबेदार रामनारायण कालुंडिया उर्फ गंगाराम कालुंडिया का शहादत दिवस उनके पैतृक ग्राम इलिगाड़ा में हो रीति रिवाज व पारंपरिक तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित कर मनाई। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी संघ ने अपने वीर योद्धा को शहीद स्थल पहुंच परिजनों संग उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद के उनके मार्ग पर चलने की शपथ ली। 1978 से शुरू हुई स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना (ईचा डैम) के विरुद्ध जनआंदोलन करने वाले आज भी 120 गांव के आदर्श है। उनकी ही दें है कि 48 वर्ष भीत जाने के पश्चात आज तक डैम का निर्माण नहीं हो पाया। इसी के साथ शुरू हुई परियोजना चांडिल डैम और गालूडीह बराज पूर्ण कर ली गई। किंतु वहां के वहां की विस्थापित आज भी दर दर की ठोकरें खाने को विवश है। न सही मिअवजा मिला न ही सही पुनर्वास। ईचा डैम की लड़ाई में गंगाराम और सिदीयू तीयू व साथियों ने किसी भी कीमत पर डैम नहीं बनने देने की प्रण कर रखी थी। पूर्ण रूप से 87 गांव और आंशिक रूप 39 गांव को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बिहार और उड़ीसा की पुलिस को दांतों तले चना चबवा दिया था। संघ के अध्यक्ष बीर सिंह बिरुली ने श्रृद्धांजलि सभा के बाद जानकारी साझा करते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा में शहीद होने नायब सूबेदार गंगाराम जी के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है डैम आज तक पूर्ण नहीं हो पाया। उनकी शहादत संघ को ईचा डैम रद्द करने को प्रेरणा प्रदान करती है। उनके आदर्शों पर चल कर हमे उनके आंदोलन को जिंदा रख आगे की लड़ाई जारी रखनी चाहिए। हेमंत सोरेन की अबुआ सरकार 2014 के टी.ए.सी में ईचा डैम को रद्द करने की अनुशंसा की थी। किंतु हेमंत सोरेन की पूर्ण बहुमत वाली महागठबंधन की सरकार ने 2025 की टी.ए.सी में डूब क्षेत्र का दायरा कम कर 18 गांव को प्रभावित कर डैम निर्माण को सहमति दी।
जिससे 120 गांव के ग्रामीणों में काफी रोष है। झामुमो के मंत्री और विधायकों ने डैम के मुद्दे का सिर्फ राजनीतिक लाभ लिया। और आदिवासी मूलवासियों को धोखा देकर छलने मात्र का काम किया। आने वाले दिनों में जनांदोलन चला कर ओछी राजनीति करने वाले प्रतिनिधियों को सबक सिखाने की जरूरत है। संघ द्वारा जन आंदोलन के साथ न्यायिक लड़ाई लगातार जारी है। श्रद्धांजलि सभा में सुरेश चंद्र सोय, रेयांस सामड,श्याम कुदादा, रविन्द्र अल्डा, गुलिया कालुंडिया, बिरसा गोडसोरा, गणेश बारी, सुभाष कालुंडिया, कोकचो मुखिया मनीला देवगम, संजीत देवग़म,जयकिशन बिरुली , गोसा बिरुली, सोना बिरुली, सलूका बारी, लालू कालुंडिया एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

