असम चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के अधिकांश विधायक झामुमो का दामन थामने की तैयारी में जुटे

 असम चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के अधिकांश विधायक झामुमो का दामन थामने की तैयारी में जुटे

हेमन्त सोरेन के नजदीकी यस मैन दीपक बिरुआ के सम्पर्क में हैं कांग्रेस के सात विधायक, संख्या बल बढ़ाने पर रणनीति बनाने में जुट हैं मंत्री दीपक बिरुआः सुत्र

असम चुनाव की कमान संभाल रहे हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन की लोकप्रियता जनता के बीच सर चढ़ कर बोल रही है। सुत्र



असम में झामुमो की लोकप्रियता से कांग्रेस पार्टी घबराई हुई है, भाजपा भी सकते में है। सुत्र



साल के मई माह में बड़ी राजनीतिक घटना क्रम का सामना करना पड़ सकता है। सुत्र।



झामुमो अब झारखण्ड में कांग्रेस मुक्त सरकार बनाने पर रणनीति बना रही है?


संतोष वर्मा

Chaibssaःझारखंड में महागठबंधन की हेमन्त सोरेन की सरकार में मुख्य घटक दल कांग्रेस पार्टी के अन्दर अपने ही पार्टी के प्रति असंतोष एवं बगावत की खबर सामने आ रही है। वहीं चौंकाने वाली खबर यह है कि हेमन्त सोरेन सरकार के प्रियपात्र एवं केबिनेट मंत्री दीपक बिरुआ के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार मंत्री दीपक बिरुआ के सम्पर्क में कांग्रेस के सात विधायक हैं, जो  कांग्रेस छोड़ कर झामुमो का दामन थामने को तैयार हैं, यह भी कहा जा रहा है कि असम चुनाव के बाद यह संख्या बारह तक पहुंच सकती है। झामुमो और कांग्रेस में दूरी इतनी बढ़ चुकी है कि दूरी अब खाई में बदल चुकी है। राजनीतिक दिग्गजों के हवाले से स्पष्ट किया गया है कि असम चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी में टूट निश्चित है, साथ यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी छोड़ने वाले सभी विधायक झामुमो के पक्ष में हैं, यानी हेमन्त सोरेन के के नेतृत्व को स्वीकार करने का मन बना चुके हैं। असम चुनाव में हेमन्त सोरेन झारखण्ड में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरी नज़र रखे हुए हैं। कांग्रेस पार्टी के विधायक भी मंत्री दीपक बिरुआ के साथ लगातार सम्पर्क बनाए हुए हैं, ऐसी जानकारी राजनीतिक पंडितों के पास है। झामुमो दलबदल कानून को ध्यान में रखते हुए संख्या बल पर जोर आजमाईश करने में लगे हुए हैं। आने वाले समय में झामुमो अपने दम पर कांग्रेस मुक्त सरकार बनाने पर रणनीति बना रही है, जिसका रूपरेखा असम चुनाव के बाद तय किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो हेमन्त सोरेन की सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्री के भ्रष्टाचार कार्यशैली से झामुमो एवं हेमन्त सोरेन को काफी बदनामी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष कर ग्रामीण कार्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग के मंत्री के कार्यकलाप से सरकार की छवि धूमिल हुई है। असम चुनाव में कांग्रेस पार्टी के द्वारा झामुमो को इग्नोर किया जाना कांग्रेस पार्टी के लिए झारखण्ड में बड़ा नुकसान होने वाला है, नुकसान का असर असम चुनाव में भी कांग्रेस को उठाना पड़ रहा है, लेकिन अब समझौते का समय निकल चुका है। असम चुनाव में झामुमो की दमदार उपस्थिति से कांग्रेस घबरा चुकी है। असम चुनाव में झामुमो अपनी चुनावी मैदान में अपने आप को कांग्रेस से अधिक मजबूत मान रही है। असम चुनाव में झामुमो को खोने का कोई डर नहीं है, बल्कि झामुमो को असम से एक नई ऊर्जा मिलने और पार्टी का विस्तार करने का एक नया अवसर प्राप्त होगा, असम की जनता के बीच हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन की लोकप्रियता को कांग्रेस पार्टी के साथ साथ भाजपा में भी बेचैनी देखने को मिला रही है। भाजपा असम चुनाव में झामुमो की बढ़ती लोकप्रियता को अपने राजनीतिक लाभ और हानि से जोड़ कर देख रही है। असम चुनाव में झामुमो और कांग्रेस में तालमेल नहीं होने से भाजपा को लाभ मिलने और कांग्रेस को सत्ता पाने से काफी दूर कर देने की खबर सामने आ रही है।2026 के मई माह झारखण्ड सरकार के लिए बहुत ही खास होने की चर्चा हो रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी के लिए अग्नि परीक्षा साबित होने वाली है। सूत्रों के अनुसार हेमन्त सोरेन के यस मैन के रुप में पहचान बना चुके मंत्री दीपक बिरुआ पूर्ण रूप से झामुमो की सरकार बनाने की रणनीति को सफल बनाने में लगे हुए हैं।

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