उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है, जो मानव को ज्ञान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान कर व्यक्तित्व का विकास करता है
उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में *प्रोजेक्ट परख:- टॉप से टॉपर तक का सफर* संबंधित उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया
संतोष वर्मा
Chaibasaःपश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी -सह- उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में *प्रोजेक्ट परख:- टॉप से टॉपर तक का सफर* संबंधित उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक परियोजना पदाधिकारी तथा विभिन्न माध्यमिक एवं प्लस टू उच्च विद्यालय के प्राचार्य के द्वारा भाग लिया गया। इस क्रम में उपायुक्त के मार्गदर्शन में उपस्थित छात्राओं के द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सभी को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है, जो मानव को ज्ञान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान कर व्यक्तित्व का विकास करता है। शिक्षा हमें सही गलत में भेद करना सिखाती है एवं बेहतर करियर का अवसर प्रदान कर आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत तरक्की, बल्कि एक स्वस्थ और विकसित समाज एवं राष्ट्र के निर्माण की नींव है। यह हमें अनुशासन, नैतिकता और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है तथा समाज में व्याप्त भेदभाव को खत्म कर समानता और सम्मान पूर्वक जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करती है।
उपायुक्त ने बताया कि प्रोजेक्ट परख सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, अपितु शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का संवेदनशील व सुनियोजित पहल है। जिसका उद्देश्य है बच्चों के सीखने के स्तर को समझना, सुधारना और उन्हें अपनी सीख में सक्रिय भागीदार बनना है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी के प्रयास से राष्ट्रीय शिक्षा नीति सूचकांक जॉय ऑफ़ लर्निंग के माध्यम से अच्छे परिणाम को प्राप्त किया जा सके। इसके तहत बच्चों को सिर्फ पढ़ाया ही नहीं जाता है बल्कि उसके सोच को भी आकार प्रदान किया जाता है। यह प्रोजेक्ट कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न चरणों में संचालित होगी। जैसे- बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना, ताकि ड्रॉप आउट को पूरी तरह से रोका जा सके। बच्चों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से क्षमता निखारने, पुस्तकालय से जोड़कर ज्ञान अर्जन को प्रेरित करने, नियमित रूप से जांच परीक्षा का आयोजन, सिलेबस का संयोजन, विशेष कक्षा का आयोजन आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिला अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए तथा जिले के रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए, सभी को अपने दायित्वों का उचित निर्वहन करना आवश्यक है।

