झारखंड में तबादलों का भ्रष्टाचार उद्योग, बना प्रशासन, सिस्टम पूरी तरह बेपटरी, जवाबदेही खत्म:- धी. रामहरि पेरियार
Chaibasaःएंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व लोकसभा एवं विधानसभा प्रत्याशी धी. रामहरि पेरियार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि झारखंड के बुआ सरकार में बड़े पैमाने पर तबादला-पोस्टिंग अब प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक खुला भ्रष्टाचार उद्योग बन चुका है।
उन्होंने कहा कि स्थिति यह हो गई है कि अधिकारी किसी क्षेत्र को समझने और काम शुरू करने से पहले ही उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। इससे विकास कार्य ठप हैं, योजनाएं अधूरी हैं और जनता सिर्फ कागजों पर दिखाए जा रहे विकास के झूठे दावों के बीच पिस रही है।
पेरियार ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि 2–3 साल के न्यूनतम कार्यकाल का नियम अब सिर्फ फाइलों में दफन होकर रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि अबुआ सरकार में ट्रांसफर-पोस्टिंग पूरी तरह सेटिंग-गेटिंग और लेन-देन का खेल बन चुका है, जहां अधिकारी नहीं बल्कि दलाल और बिचौलिये तय कर रहे हैं कि कौन कहाँ रहेगा।
उन्होंने कहा कि ऊपर से लेकर नीचे तक एक संगठित सिस्टम के तहत तबादलों को कमाई का जरिया बना दिया गया है। नतीजा यह है कि जवाबदेही नाम की चीज पूरी तरह खत्म हो चुकी है और भ्रष्टाचार बेलगाम होकर जनता के अधिकारों को निगल रहा है।
धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि जब प्रशासन ही स्थिर नहीं रहेगा तो विकास कैसे होगा? जब अधिकारी ही सुरक्षित नहीं होंगे तो वे जनता के हित में निष्पक्ष होकर काम कैसे करेंगे? यह सीधा-सीधा शासन व्यवस्था को कमजोर करने वाला खेल है।
उन्होंने राज्य सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर यह तबादला उद्योग कब बंद होगा? क्या झारखंड को प्रशासनिक स्थिरता मिलेगी या फिर जनता इसी तरह लुटती रहेगी और व्यवस्था इसी तरह बिकती रहेगी? ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रणाली को तुरंत पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाए, न्यूनतम कार्यकाल नियम को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, और पूरे ट्रांसफर रैकेट की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर ठोस कार्रवाई दिखाई दे।
