Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले में खूनी खेलः 1.17 एकड़ जमीन के विवाद में एक ही खानदान के दो पक्ष भिड़े, एक की मौत, 12 घायल


विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व में गांव के मुंडा-डाकुवा की मौजूदगी में हुई थी बैठक


Chaibasa/संतोष वर्मा: कोलहान प्रमंडल के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जमीन विवाद को लेकर कभी डायन विसाही के नाम पर तो कभी नशा के सेवन में तो कभीदो गज जमीन को लेकर आपसी रिसते में खुनी खेल होना आम बात हो गई है.ऐसी ही एक मामला कल सामने देखने को मिला पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र में जहां एक ही पारिवारिक में भूमि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।महज 1.17 एकड़ जमीन को लेकर दो पक्षों में हुई झड़प में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला सपानी कुई की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

3 महीने का विवाद महज 30 मिनट में बनगया खूनी तांडव

जानकारी के अनुसार, एक ही खानदान के दो पक्षों के बीच पिछले तीन महीनों से महज 1.17 एकड़ जमीन के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही थी। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे यह विवाद अचानक उग्र हो गया।

आंगन में काम कर रही बुजुर्ग महिला पर हमला

देखते ही देखते दोनों पक्ष लाठी-डंडे और धारदार हथियार 'दाऊली' लेकर आमने-सामने आ गए। प्रथम पक्ष के घायलों (अमित, समीर, रोया और सुखलाल जेराई) का आरोप है कि उनकी मां सपानी कुई (75) घर के आंगन में काम कर रही थीं।इसी दौरान दूसरे पक्ष के कमल जेराई, ललित जेराई, परवीन जेराई और उनके पिता विक्रम जेराई ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे बुजुर्ग महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

आंखों में स्प्रे छिड़ककर किया प्रहार

पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि जब वे अपनी मां को बचाने दौड़े तो हमलावरों ने उनकी आंखों में स्प्रे छिड़क दिया ताकि वे कुछ देख न सकें। इसके बाद दाऊली से उन पर हमला किया गया। इस हमले में रोया जेराई के हाथ की नस कट गई है, जबकि अमित जेराई का सिर बुरी तरह फट गया है। समीर और मुक्ता जेराई को भी सिर, कंधे और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं।

दूसरे पक्ष का पलटवार : ट्रैक्टर से लौटते वक्त हुआ हमला

वहीं, द्वितीय पक्ष के कमल, ललित, परवीन और विक्रम जेराई भी इस संघर्ष में लहुलुहान हुए हैं। उनका कहना है कि वे खेत से ट्रैक्टर में ईंटें लेकर लौट रहे थे, तभी पहले पक्ष के लोगों ने गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला बोल दिया। इस पक्ष के लोगों के भी सिर, हाथ, पैर और सीने में गंभीर चोटें हैं।

पंचायत की पहल भी रही नाकाम

दुखद पहलू यह है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व में गांव के मुंडा-डाकुवा की मौजूदगी में बैठक भी हुई थी। पंचायत ने जमीन का बंटवारा कर निर्माण कार्य करने का निर्णय सुनाया था, लेकिन आपसी रंजिश कम होने के बजाय और गहरी होती गई, जिसका अंत इस खूनी संघर्ष के रूप में हुआ।

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