सरायकेला: समाहरणालय सभागार में उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें निजी विद्यालयों की फीस वृद्धि पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में तय किया गया कि सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय अब अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे। इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला स्तरीय समिति की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि फीस में वृद्धि दो वर्षों से पहले नहीं की जा सकेगी।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों को पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ सत्र 2026-27 की कक्षावार शुल्क विवरणी जिला समिति को उपलब्ध करानी होगी। शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विद्यालय स्तरीय शुल्क समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य किया गया है तथा इसकी जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार के अवैध शुल्क वसूली पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। साथ ही विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब, कॉपी या पोशाक खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।
बैठक में छात्र सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि विद्यालय वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए और सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। इसके अलावा जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में लिए जा रहे शुल्क का विस्तृत विवरण एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए, ताकि निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
