चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी का मामला सामने आते ही पशुपालन घोटाला की याद ताजा कर दिया

 चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी का मामला सामने आते ही पशुपालन घोटाला की याद ताजा कर दिया



जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से कोषागार से अवैध निकासी किए जाने से इंकार नहीं किया जा रहा है। सुत्र

पुलिस प्रशासन के अधीन लेखा पदाधिकारियों एवं रोकड़पाल की भूमिका संदेहास्पद मानी जा रही है। सुत्र

राज्य भर के कोषागार पदाधिकारी की भूमिका संदेहास्पद है, आय से अधिक सम्पत्ति की जांच करने कि आवश्यकता है

पुलिस प्रशासन के द्वारा अवैध निकासी किए जाने की जांच की आंच SP और DC ऑफिस तक पहुंच सकती है

संतोष वर्मा

Chaibasaःपुलिस प्रशासन के द्वारा राज्य भर में कोषागार से लाखों की अवैध निकासी से एक बार फिर से पशुपालन घोटाला की याद को ताज़ा कर दिया है। पशुपापन घोटाला की शुरुआत चाईबासा कोषागार से ही हुई थी। जहां एक ओर राज्य में आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से संकट में है, आर्थिक बदहाली के कारण राज्य भर में ग्रामीण विकास की गति थम चुकी है। कर्मचारियों को वेतन भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। ऐसीझ परिस्थिति में राज्य भर में पुलिस प्रशासन के द्वारा अवैध निकासी आम जनता को हिला कर रख दिया गया। राज्य सरकार के वित्त विभाग के द्वारा सभी कोषागारों में जांच गठित करने से यह मामला सामने आया है, जांच का दायरा जैसे जैसे बढ़ रहा है वैसे वैसे अवैध निकासी का नया मामला पकड़ में आ रहा है। जनता हतप्रभ है कि इस तरह की अवैध निकासी में कोषागार पदाधिकारी क्या कर रहे थे, उन्होंने इस अवैध निकासी को कैसे नहीं पकड़ा या रोक क्यूं नहीं लगाया। जनता पूरी तरह से यह मानती है कि बिना कोषागार पदाधिकारी के सांठगांठ से किसी भी विभाग में अवैध निकासी हो ही नहीं सकती है, पुलिस प्रशासन से अधिक जिला प्रशासन यानी कोषागार पदाधिकारी दोषी हैं। इन्हें तत्काल जांच के घेरे में लेते हुए इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित किया जाना चाहिए, साथ ही उनके विरुद्ध आय से अधिक सम्पत्ति की जांच भी होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन की लेखा पदाधिकारियों और कोषागार पदाधिकारी के संबंधियों तक की सम्पत्ति पर नजर रखते हुए जांच होनी चाहिए। यूं ही जनता की मेहनत और टैक्स का पैसा को खाने नहीं दिया जा सकता है। इस अवैध निकासी और कोषागार घोटाला की जांच की आंच SP और DC के ऑफिस तक पहुंच सकती है, दोनों उच्चाधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। दोनों पदाधिकारी जिम्मेदार पद पर रहते हुए इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई है, यह सवाल जनता जानना चाहती है।

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