झारखण्ड की राजनीतिक में हेमन्त के बिना कुछ भी संभव नहीं है, असम में झामुमो अपने राजनीतिक एवं पार्टी के विस्तार करने पर मेहनत कर रही है। सूत्र
असम चुनाव झामुमो अपनी पार्टी को मैदान पर उतार कर कांग्रेस पार्टी का समीकरण बिगाड़ दिया है। सुत्र
सरयू राय के खुले सुझाव से झामुमो में राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है, झामुमो अब मन बना चुकी है भाजपा और कांग्रेस से लोहा लेने का। सुत्र
कांग्रेस को सत्ता में रहकर भ्रष्टाचार की खुली छूट नहीं दी जा सकती है, कांग्रेस कोटे के मंत्री के विभागों में ED का कार्रवाई से राज्य सरकार की बदनामी हुई है। सुत्र
चाईबासा/संतोष वर्मा: झारखण्ड राज्य अब हेमन्त सोरेन के नाम से जाना जाने लगा है, ऐसा इसलिए यह स्थिति सामने आया है, क्यूंकि राज्य की जनता के साथ साथ राजनीतिक पार्टी के लोग भी हेमन्त सोरेन की लोकप्रियता और सफल राजनीतिक रणनीति से राष्ट्रीय पार्टी भाजपा को हाशिए पर ला खड़ा कर दिया है। जिस ढंग से बीते विधानसभा चुनाव अपने दम पर हेमन्त और कल्पना की जोड़ी अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में सफल रही, वहीं अपने घटक दलों को भी जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। आज के राजनीतिक परिदृश्य में हेमन्त सोरेन राष्ट्रीय स्तर पर एक साहसी, योग्य एवं परिपक्व नेता के रूप में पहचान बनाने में सफल हुए हैं। आज भाजपा और कांग्रेस झारखण्ड में अपने आप को झामुमो के आगे नतमस्तक है। असम चुनाव में झामुमो अपनी पार्टी को मैदान में उतर कर आगे की राजनीतिक रूप रेखा को तय कर लिया है, असम में झामुमो को खोने वाले का डर नहीं है, बल्कि राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है, यह उम्मीद सच होता नज़र आ रहा है।
जिस ढंग से झामुमो अपनी पूरी टीम के साथ असम चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के साथ दो दो हाथ करती हुई दिख रही है, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि हेमन्त सोरेन अपनी विरासत को आगे लेकर जाना चाहते हैं। वर्तमान समय में असम में चुनाव हो रहा है, लेकिन झारखण्ड में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए झामुमो को कई तरह से ऑफर आना शुरू हो गया है। हाल के दिनो में चाणक्य के रूप में जाने वाले सरयू राय का बयान से झामुमो को और भी बल मिलता दिख रहा है, यही नहीं आंकड़ा के हिसाब से भी कांग्रेस के बिना बहुमत की सरकार झामुमो बना सकती है। राजद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, निर्दलीय के साथ बहुमत का आंकड़ा पार होता नज़र आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी के अधिकांश आरक्षित सीट से जीतने वाले विधायकों का अपने ही पार्टी से मोह भंग होने की चर्चा हो रही है। दिल्ली में बैठे कांग्रेस के आलाकमान की अनदेखी और असंतुष्टों को संतुष्ट नहीं करने का खामियाजा भुगतना पड़ता नजर आ रहा है। झामुमो के सम्पर्क में कांग्रेस के विधायकों का होना सिर्फ चर्चा नहीं है बल्कि हक़ीक़त है। राजनीतिक पंडितों एवं विशेष कर झामुमो के बड़े नेता के अनुसार असम चुनाव के बाद पिक्चर साफ होगा, सत्ता से काग्रेस का हटना तय माना जा रहा है।

