आदिवासी ग्रामीण मजदूरो के हक पर कोई समझौता नहीं – जरूरत पड़ी तो 20 अप्रैल से चक्का जाम: मधु कोड़ा
संतोष वर्मा
Chaibasaः गुवा में सेल प्रबंधन के खिलाफ मानकी-मुंडा के बैनर तले स्थानीय आदिवासी ग्रामीण मजदूरों को रोजगार एवं रैयतों की मांगों को लेकर 15 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 तक चल रहे भूख हड़ताल कार्यक्रम में आज पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आंदोलनरत आदिवासी ग्रामीण मजदूरों और रैयतों को संबोधित करते हुए उनके संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई।
अपने संबोधन में मधु कोड़ा ने आंदोलन के नाम पर लोगों को गुमराह करने वाले तत्वों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, जो एक तरफ आंदोलनकारियों के साथ खड़े होने का दिखावा करते हैं और दूसरी ओर ठेका, टेंडर, ट्रांसपोर्टिंग व लोडिंग का काम लेने के लिए अपने निजी स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सेल प्रबंधन को स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देना चाहिए। जिन आदिवासी रैयतों की जमीन खनन कार्य के लिए ली गई है, उन्हें रोजगार देना कंपनी की जिम्मेदारी है। साथ ही जिन ग्रामीण किसानों की जमीन और खेत खनन से प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की सभी मांगों को अविलंब स्वीकार किया जाए।
मधु कोड़ा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि 20 अप्रैल तक मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो चक्का जाम किया जाएगा, जिसका वे स्वयं सड़क पर उतरकर समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि वे एक मजदूर के बेटे हैं और आदिवासी ग्रामीण मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। मजदूर हितों की अनदेखी करने वाली किसी भी बड़ी ताकत को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह कोल्हान की धरती है, जहां अपने हक और अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाती है।
मजदूरों की मुख्य मांग:
स्थानीय मजदूरों एवं प्रभावित रैयतों को खनन एवं संबंधित कार्यों में प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार दिया जाए।

