चाईबासा: कोल्हान में आगामी 14 अप्रैल को आयोजित होने वाली डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती को भव्य रूप देने की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। इसी क्रम में रविवार, 29 मार्च को पोटो हो’ सह गौशाला पार्क में आदिवासी–मूलवासी समूह के युवाओं की दूसरी बैठक संपन्न हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक की शुरुआत सभी प्रतिभागियों के परिचय और कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा से हुई। इसके बाद सर्वसम्मति से सुश्री रिपान्जली लकड़ा को बैठक की अध्यक्षता के लिए चुना गया। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता एवं देशाउली फाउंडेशन के संस्थापक साधु हो’ ने कहा कि अंबेडकर साहब की विचारधारा को पहले स्वयं आत्मसात करना होगा, तभी जयंती को प्रभावशाली रूप से मनाया जा सकेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि मंच से भाषण के बजाय जीवन में हुए भेदभाव और असमानता के अनुभव साझा किए जाएँ, जिससे कार्यक्रम अधिक असरदार बने।
मोची समाज के प्रतिनिधि नरेश राम और संतोष दास ने कहा कि निमंत्रण के लिए हर समाज के युवा यदि विभिन्न गांवों और मोहल्लों में जाकर संयुक्त रूप से सहयोग करें, तो सामाजिक भेदभाव कम होगा और आपसी सद्भावना बढ़ेगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि 14 अप्रैल को चाईबासा में अंबेडकर जी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
मुखी समाज एवं भीम आर्मी के सदस्य आकाश मुखी ने सुझाव दिया कि एक डेलिगेशन बनाकर हर समाज के प्रमुखों से व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण किया जाए। उन्होंने सदस्यता शुल्क निर्धारित करने पर भी जोर दिया, ताकि आयोजन के लिए पर्याप्त फंड सुनिश्चित हो सके और अंबेडकर जी के विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जा सके।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि अगली बैठक मंगलवार, 31 मार्च को आयोजित होगी, जिसमें आयोजन समिति का पुनर्गठन और रैली व कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस बैठक का संचालन पूर्व सचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता नारायण कांडेयांग ने किया और धन्यवाद ज्ञापन भी दिया।
बैठक में उरांव समाज से विष्णु मिंज और रिपांजल लकड़ा, हो’ समाज से साधु हो’, संदीप सनी देवगम, जोंगा तियु, मीनाक्षी चम्पीया, सोनाराम तियु, रोशन पुरती, मुखी समाज से आकाश मुखी, तथा अन्य वर्गों से संतोष दास, मौसम राम और कई सदस्य ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

