चाईबासा/संतोष वर्मा: पश्चिमी सिंहभूम जिला में पिछले 10 दिनों से कांग्रेस द्वारा सांगठनिक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और झारखंड सरकार के मंत्री लगातार चाईबासा दौरा कर रहे हैं। परंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब क्षेत्र की जनता गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, तब कांग्रेस अपने संगठनात्मक दिखावे में व्यस्त है।
हाल के दिनों में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की (कृषि विभाग), इरफान अंसारी (स्वास्थ्य विभाग) एवं दीपिका सिंह पांडे (पंचायती राज विभाग) का चाईबासा दौरा हुआ। इन तीनों विभागों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग में आयुष्मान भारत घोटाला, पंचायती राज विभाग के अंतर्गत मनरेगा घोटाला (कार्य अनियमितता एवं भुगतान गड़बड़ी) तथा कृषि विभाग में बीज वितरण घोटाला जैसे मामलों ने जनता का विश्वास तोड़ा है।
पश्चिमी सिंहभूम की जनता आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। किसानों को उनकी उपज का बकाया भुगतान नहीं मिल रहा है। विभिन्न विभागों में ठेका एवं टेंडर प्रक्रिया महीनों से लंबित है और संवेदकों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं। इतना ही नहीं, आज तक क्षेत्र के अस्पताल में समुचित ब्लड बैंक की स्थापना नहीं हो पाई है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
भाजपा यह सवाल उठाती है कि जब मंत्रीगण क्षेत्र में आ रहे हैं, तो वे इन घोटालों और समस्याओं पर खुलकर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? क्या कांग्रेस की सांगठनिक गतिविधियां सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास हैं?
साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है कि वह सत्ता में रहते हुए अपने सहयोगी मंत्रियों पर क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु कोई दबाव क्यों नहीं बना रही है। क्या जनता की समस्याएं इनके लिए प्राथमिकता नहीं हैं।
हम मीडिया से भी आग्रह करते हैं कि वह इन गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाए और संबंधित मंत्रियों से पूछे कि उनके विभागों में हुए घोटालों पर उनका क्या पक्ष है तथा पश्चिमी सिंहभूम की जनता को राहत कब तक मिलेगी। उक्त बातें जितेंद्र नाथ ओझा मीडिया प्रभारी भाजपा, पश्चिमी सिंहभूम के द्वारा कही गई है।
