झामुमो अब क्षत्रीय पार्टी से निकल कर राष्ट्रीय पार्टी बनने के सपने को साकार करने के लिए कल्पना सोरेन को दिल्ली के राजनीतिक में भेजना चाहती है


कल्पना सोरेन झामुमो का उज्जवल भविष्य है, बीते लोकसभा और विधानसभा में झामुमो को ऊँचाई पर पहुंचाने में भारी योगदान रहा है


कल्पना सोरेन के कलेवर और इच्छा शक्ति को दिल्ली के राजनीतिक में पार्टी देखना चाहती है

कल्पना सोरेन के आगे कोई भी राजनीतिक पार्टी के नेता टिक नहीं पातें हैं

कल्पना सोरेन राष्ट्रीय स्तर पर झामुमो को पहचान दिलाने में भूमिका निभा सकती है, साथ ही कल्पना सोरेन देश स्तर पर आदिवासी समुदाय का नेतृत्व करने की भी जिम्मेदारी उठा सकती है

कल्पना सोरेन के राज्यसभा में जाने से झामुमो को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है

किया ससुर की जगह लेगी गाण्डेय विधायक कलपना सोरेन


रांची डेस्क/संतोष वर्मा: झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से दिशोम गुरू शिबु सोरेन की बहु सह गाण्डेय विधायक कलपना सोरेन को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है. ताकी पार्टी को राष्टीय स्तर पर पहचान मिल सके, कलपना सोरेन आज पार्टी के लिए स्टार प्रचारक के साथ साथ चर्चित नेत्री के रूप में स्थापित हो गई है, और जिस तरह लोकसभा व विधानसभा चुनाव में अपनी छाप लोगों के बिच बनाने में सफल रही यह सभी बड़े राजनितिक दल के बड़े नेता भी देख चुके है. अब झारखंड कोटे से राज्यसभा की 6 सीटें हैं. जिसमें दो राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट झामुमो के कोटे की है. वहीं भाजपा के राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है. इस तरह राज्य की दोनों सीटों पर चुनाव होगा. जिसे जीतने के लिए महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं. एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरूरत होती है. सत्ताधारी महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं- झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (चार) और भाकपा (माले) (दो)। ऐसे में राजनीति की गलियारों में चर्चा है कि अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन राज्यसभा जाकर झारखंड के मुद्दों को दिल्ली में उठाएंगी. हालांकि कल्पना सोरेन राज्यसभा जाएंगी या नहीं इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है. माना जा रहा है कि गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का राज्यसभा में जाना झामुमो और झारखण्ड की राजनीति पर इसके कई व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं.

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