मेयर चुनाव में बादलों से धुंध हटने लगी है, प्रकाश का दर्शन होने वाला है। राजनीतिक सुत्र
भाजपा समर्थक रमेश खिरवाल और झामुमो समर्थक नितिन प्रकाश में सीधी टक्कर में, नितिन प्रकाश की स्थिति मजबूत। सुत्र
सुनील साव, फैयाज खान और काबू दत्ता चुनाव मैदान में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। सूत्र
मुस्लिम समुदाय का वोट बंटवारा होना तय, अधिकांश वोटर नितिन प्रकाश के पक्ष में। सुत्र
आज का दिन खास, मुस्लिम और उरांव समुदाय का समर्थन किए जाने की चर्चा। सुत्र
जनता अपनी वोट को बर्बाद नहीं करना चाहती है, दो ही प्रत्याशी पर चिंतन मंथन का दौर जारी। सुत्र
संतोष वर्मा
Chaibasaः चाईबासा नगर पर्षद के मेयर चुनाव में अब बादलों से धुंध हटने लगी है, यानी प्रकाश का दर्शन होने लगा है। हां यह उसी प्रकाश की बात हो रही है, जो मेयर चुनाव में प्रकाश बनकर उभरे हैं, नितिन प्रकाश की तुलना में मात्र भाजपा समर्थित प्रत्याशी रमेश खिरवाल उनका पीछा करते नजर आ रहे हैं। सुनील साव और काबू दत्ता चुनाव मैदान में प्रकाश और खिरवाल से काफी पीछे नज़र आ रहे हैं। सूत्रों की माने तो जनता दो ही प्रत्याशी पर फोकस कर रही है, जनता वोट बर्बाद करने के पक्ष में नहीं है।नितिन प्रकाश की स्थिति बेहतर होने के कारण मुस्लिम समाज का अधिकांश वोट झामुमो समर्थक प्रत्याशी नितिन प्रकाश के तरफ झुकता नजर आ रहा है। रमेश खिरवाल के सर पर बड़े भाई और बड़े घराने की छत्रछाया होने की चर्चा का बहुत असर नहीं देखा जा रहा है। आज चुनाव प्रचार के आखरी दिन में दो ही प्रत्याशी पर चर्चा आम हो चुकी है। परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ खुलकर नितिन प्रकाश के लिए जी जान से लग गए हैं। सत्र में मशगूलियत के बाद भी रांची से मंत्री ने रणनीति बना कर काम कर रहे हैं। इस चुनाव में मधु कोड़ा के द्वारा अचानक से प्रचार प्रसार किनारा कसी किए जाने की चर्चा से तरह तरह की चर्चा हो रही है। नितिन प्रकाश की गोपनीयता और सक्रियता काफी मायने निकल रहे हैं। महिलाओं में एक तरफ झुकाओ नितिन प्रकाश की ओर देखा जा रहा है, इस झुकाओ को नितिन प्रकाश वोट में कितने हद तक बैलेट में मुहर लगवाने में सफल होते हैं, यह तो मतगणना के दिन ही दिखेगा। जोहार डिजिटल के सर्वे रिपोर्ट में झामुमो समर्थक नितिन प्रकाश और भाजपा समर्थक रमेश खिरवाल के बीच सीधे टक्कर में नितिन प्रकाश का पलड़ा भारी माना जा रहा है। वही फैयाज खान, सुनील साव और काबू दत्ता काफी पीछे नजर आ रहे हैं। ऐसे में जनता अब सीधे दो ही प्रत्याशी पर निर्भर दिख रही है।

