Jamshedpur: पटमाड़ा में गरजे चंपाई सोरेन, कहा - राज्य सरकार ने ग्राम सभाओं के अधिकार छीन लिए हैं

झारखंड सरकार ने पेसा के नाम पर आदिवासियों को धोखा दिया: चम्पाई सोरेन

पटमदा में गरजे चम्पाई सोरेन - राज्य सरकार ने ग्राम सभाओं का अधिकार छीना

आदिवासियों को खत्म करने की तैयारी में झारखंड सरकार: चम्पाई सोरेन


जमशेदपुर: पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन झारखंड सरकार द्वारा लागू की गई पेसा नियमावली के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में आज वे पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा पहुंचे, जहाँ उन्होंने राज्य सरकार पर जम कर निशाना साधा।

पेसा नियमावली को राज्य के आदिवासियों के साथ "धोखा" बताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज बेसब्री से पेसा के लागू होने का इंतजार कर रहा था, लेकिन नियमावली को पढ़ने से पता चलता है कि वास्तव में इसके द्वारा ग्रामसभा के अधिकारों को खत्म कर दिया गया है। 

पूर्व सीएम ने कहा कि उनके कार्यकाल में जो पेसा नियमावली बनी थी, उसमें ग्रामसभा के पास सीएनटी-एसपीटी एक्ट के उल्लंघन के मामलों में जमीन वापस करवाने का अधिकार था। शेड्यूल एरिया में किसी भी प्रकार के भूमि हस्तांतरण से पहले उपायुक्त को ग्राम सभा से अनुमति लेने का प्रावधान था, लेकिन इस सरकार ने सभी अधिकारों को खत्म कर दिया।

राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे हुए लोगों के खिलाफ सीएनटी एक्ट उल्लंघन के मामले हों, तो फिर उनसे ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की उम्मीद रखना भी बेमानी होगी। उन्होंने कहा कि मात्र 5 महीने के उनके कार्यकाल में उन्होंने जिन योजनाओं को लागू किया, राज्य सरकार उस से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। 
 
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 राज्यों को रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं तथा संसाधनों के परंपरागत प्रबंध पद्धतियों के अनुरूप नियमावली बनाने का निर्देश देता है, लेकिन झारखंड सरकार की नियमावली से ये विषय गायब हैं।
 
उन्होंने कहा कि पेसा का मूल मकसद आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य परंपराओं एवं पुरातन काल से चले आ रहे उनके स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण एवं विस्तार देना है, लेकिन यहां राज्य सरकार शायद वैसे लोगों को लाभ देना चाहती है, जो हमारी परंपराओं को पहले ही छोड़ चुके हैं। 

पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि पहले ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) और अब पेसा से राज्यपाल को बाहर कर, उनकी जगह सारे अधिकार उपायुक्त को दिए जा रहे हैं, ताकि सरकार पूरी व्यवस्था पर अपना नियंत्रण रख सके। यह पेसा की मूल भावना के खिलाफ है। 

उन्होंने कहा कि पहले से ही बांग्लादेशी घुसपैठियों तथा धर्मांतरण की दोहरी मार झेल रहे आदिवासी समाज का अस्तित्व संकट में है, और इस पेसा नियमावली द्वारा राज्य सरकार आदिवासियों को जड़ से खत्म करना चाहती है। उन्होंने इसके खिलाफ आदिवासी समाज को एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। 

पटमदा प्रखंड अंतर्गत बनातोड़िया (फातेबांद) में आयोजित इस जनसभा में बड़ी संख्या में पारंपरिक ग्राम प्रधान, मांझी बाबा, परगना बाबा तथा आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

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