सरायकेला: आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों और राजस्व ग्रामों के नामकरण को लेकर झामुमो ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। आदित्यपुर महानगर सचिव कृष्ण चंद्र महतो के नेतृत्व में झामुमो का एक प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त से मिला और स्थानीय नागरिकों व खतियानी रैयतों की ओर से ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में दो प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली मांग राजस्व ग्रामों के नाम के आगे ‘बस्ती’ शब्द का प्रयोग बंद करने की है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि प्रत्येक राजस्व ग्राम की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, और ‘बस्ती’ शब्द जोड़ना उनके सम्मान के अनुरूप नहीं है। इसलिए सभी सरकारी अभिलेखों और व्यवहार में मूल नामों का ही उपयोग किया जाए।
दूसरी महत्वपूर्ण मांग भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों में खतियानी रैयतों के योगदान को सम्मान देने से जुड़ी है। झामुमो ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में सड़क, भवन और अन्य विकास कार्य हाउसिंग बोर्ड, सरकारी अनावाद भूमि, वन विभाग भूमि और खतियानी रैयत भूमि—चार प्रकार की जमीनों पर होते हैं। ऐसे में जब निजी रैयती जमीन जनहित में उपयोग की जाती है तो इसे भूमि दान के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि नगर निगम के अमीन द्वारा उन सभी सड़कों और भवनों की पहचान की जाए जो रैयती भूमि पर बने हैं, और उनका नामकरण संबंधित खतियान धारियों या भूमि दानदाताओं के नाम पर किया जाए। इससे दानदाताओं को सम्मान मिलने के साथ-साथ झारखंडी अस्मिता को भी मजबूती मिलेगी।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में जगदीश महतो, रविंद्र बास्के, अभि मुखी, शंकर मुखी, डोनाल्ड मंगल, मंगल माझी, शिव लोहार और राहुल मुखी सहित कई लोग मौजूद रहे।
