पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा के झामुमो पर आरोप बौखलाहट का नतीजाःबुधराम लागुरी
संतोष वर्मा
Chaibasa: पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा के झामुमो पर आरोप बौखलाहट का नतीजा है। सारंडा मामले पर बोलने से पहले अपने आईने में झांकें भाजपा, सारंडा में हुए दो ग्राम सभाओं में अनुपस्थित होकर एक तरह से अडानी को मदद कर रहे थे। जबकि झामुमो ने सारंडा के आदिवासी मूलवासी की आवाज को राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने का कार्य किया। आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा ने सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर को होने वाले फैसले को 13 नवम्बर 2025 को फैसला कर दिया। जिसमें आदिवासी मूलवासी के विस्थापित नहीं करने की मांग को राज्य और सुप्रीम कोर्ट ने मानी। यह बातें आज झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने श्रीमती कोड़ा द्वारा झामुमो पर दोहरी राजनीति करने के आरोप पर अपना प्रतिक्रिया दी है। श्री लागुरी ने कहा कि भाजपा झूठ और मनगढ़ंत कहानियों से जनता को गुमराह नहीं कर सकती। जिले की जनता भाजपा की चाल और चरित्र को अच्छी तरह से समझती है। जिसके कारण ही जनता ने जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को खदेड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमती कोड़ा जी की बयानबाज़ी बौखलाहट और निराधार आरोपों का पुलिंदा है। जिले की जनता जानती है कि हेमंत सोरेन की सरकार पारदर्शिता, संवैधानिक व्यवस्था और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध है, न कि भाजपा सरकार की तरह राजनीतिक दुर्भावना से। श्रीमती कोड़ा जी के आरोप यह साबित करते हैं कि भाजपा अब विपक्ष की भूमिका में भी जिम्मेदारी से काम करने की बजाय केवल अफवाह फैलाने और झूठ की राजनीति में जुटी है। श्रीमती कोड़ा को चाहिए कि वे जनता के असल मुद्दों पर बोलें, न कि अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए निराधार आरोपों का सहारा लें। सारंडा की जनता की मांग पर झामुमो जिला समिति ने कोल्हान - पोड़ाहाट, सारंडा बचाओ समिति के आर्थिक नाकेबंदी पर अपना नैतिक समर्थन दिया था और उचित भी था क्योंकि झामुमो आरम्भ से ही आदिवासी मूलवासी और जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा को लेकर राजनीति करते आई है ऐसे में सारंडा के मामले में कैसे चुप रह सकती है। सारंडा वासियों के आंदोलन और उनकी मांग पर यशस्वी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेते हुए अखबार के माध्यम से भी स्पष्ट रूप से कहा था खनन हित नहीं सारंडा के आदिवासियों के अधिकारों को प्राथमिकता और सुप्रीम कोर्ट ने भी वन अधिकार अधिनियम को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया है भाजपा को जनता की इतना ही चिंता है तो केन्द्र सरकार से वार्ता कर सारंडा वासियों के लिए सर्वांगीण विकास के प्रति कार्य करें और राज्य के कोल्हान, पोड़ाहाट, सारंडा समेत सभी जंगलों में रह रहे आदिवासी मूलवासी तक पहुंच पथ निर्माण में हो रही बाधा के लिए केंद्र सरकार से अनाप्ति प्रमाण पत्र दिलवा दे। ताकि सड़क निर्माण कर जंगलों बसे आदिवासी मूलवासी लोगों को विकास के मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।
