चाईबासा चेंबर का कोष पूर्णतः सुरक्षित, संगठन की साख से खिलवाड़ बर्दार्श्त नहीं

चाईबासा चेंबर का कोष पूर्णतः सुरक्षित, संगठन की साख से खिलवाड़ बर्दार्श्त नहीं,मानसिक संतुलन खो चुके है अनूप सुल्तानिया


490 सुधीजनों की संस्था है चाईबासा चेंबर, किसी की बपौती नहीं

 santosh verma

Chaibasaः चाईबासा चेंबर के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष संजय चौबे की अध्यक्षता में गाँधी टोला स्तिथ चाईबासा चेंबर के अस्थायी कार्यालय में आहूत की गयी बैठक का विचारणीय विषय चाईबासा चेंबर से निष्कासित व्यक्तियों के समूह द्वारा चाईबासा चेंबर के सदस्यों को दिग्भ्रमित करने का कुप्रयास एवं चाईबासा चेंबर की साख को धूमिल करना था , बैठक में विस्तृत चर्चा उपरांत  सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया की ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जिन्हे चाईबासा चेंबर की कार्यसमिति ने सर्वसम्मति से पहले ही निष्काषित कर दिया है  वैसे लोग अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति  हेतु चाईबासा चेंबर की छवि को धूमिल कर रहे है तथा इसका पटाक्षेप चाईबासा चेंबर के सम्मानित सदस्यों हेतु होना नितांत आवश्यक है ।

इस सन्दर्भ में चाईबासा चेंबर के अध्यक्ष संजय चौबे द्वारा  खंडन किया गया  है की चाईबासा चेंबर की स्थापना वर्ष 2001 में किया गया था अपने स्थापना काल से वर्ष 2009 तक अनूप सुल्तानिया द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए  चाईबासा चेंबर का संचालन किया जाता था स्वयं के मनभावन व्यक्तियों को ही पदों पर मनोनीत किया जाता था वर्णित कार्यकाल का कोई भी लेखा जोखा क्रमश : सदस्यता शुल्क , नवीकरण शुल्क ,खर्च आदि का विवरण अनेको बार पृक्षा करने पर भी आज तक अनुपलब्ध है  । वर्ष 2009 में चाईबासा चेंबर के प्रथम चुनाव से पूर्व अपने एकाधिकार का प्रयोग करते हुए अनूप सुल्तानिया मुख्य चुनाव पदाधिकारी के पद पर आसीन हो गये जबकि चाईबासा चेंबर में उनसे ज्यादा प्रतिभावान सदस्य उस पद के लिए योग्य थे खुद को राजनैतिक विशेषज्ञ समझने वाले ने  वर्ष 2012 में संविधान संसोधन के क्रम में खुद को संस्थापक घोषित कर स्वयं के लिए आजीवन मनोनीत सदस्य का पद निर्वाचित कार्यसमिति में सुरक्षित कर लिया था ,लगातार तब से तथाकथित स्वयंभू संस्थापक द्वारा वर्ष 2021 तक अपने अनुसार चेंबर को अपने स्वहित एवं राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संचालित करने का कुप्रयास किया जाता रहा है साथ ही साथ उक्त काल में चाईबासा चेंबर के निर्वाचित कार्यसमिति को अपनी स्वार्थ सिद्धि एवं चाईबासा चेंबर पर अपना स्वामित्व सिद्ध करने के उद्देश्य से दुर्व्यवहार किया जाता था । विदित हो की चाईबासा चेंबर के सम्मानित सदस्यों द्वारा संगृहीत कोष को हड़पने की मंशा के साथ अपनी धूर्तता का परिचय देते हुए कार्यसमिति के निर्णय के विरुद्ध जा कर बिना वार्षिक आमसभा में सम्मानित सदस्यों के अनुमोदन के  एक तथाकथित ट्रस्ट को पंजीकृत कर लिया तदोपरांत तत्कालीन कार्यसमिति के साथ अभद्र व्यवहार ,गाली गलोच कर जबरन कोष को चाईबासा चेंबर के मूल खाते से एच०डी०ऍफ़०सी बैंक में स्थानांतरित करवाया । अपने तय उद्देश्य एवं विकृत मानसिकता के तहत संगृहीत कोष के गबन हेतु चाईबासा चेंबर के संविधान की धज्जिया उड़ाते हुए  नयी धाराओं को समाहित किया पुरानी धाराओं को विलोपित किया  पद की लोलुपता के परिणामस्वरूप स्वघोषित मुख्य ट्रस्टी बन गए स्वहित व् परिवार हित में धाराएं ऐसी बनायीं की बतौर मुख्य ट्रस्टी उनका मनोनयन प्रत्येक निर्वाचित कार्यसमिति में अनिवार्य होगा ,किसी भी ट्रस्टी के मृत्यु उपरांत उक्त ट्रस्टी का पुत्र ही ट्रस्टी बनेगा तथा  बाकि सम्मानित सदस्य मूकदर्शक बने रहेंगे  ,कार्यसमिति के किसी भी निर्णय में मनोनीत सदस्य अर्ताथ उनकी सहमति की बाध्यता कर संविधान को अनूप चालीसा बना दिया न कोई कुछ बोल सकता न कोई कुछ पूछ सकता ।  

अध्यक्ष संजय चौबे  ने चाईबासा चेंबर ऑफ़ कॉमर्स  एंड इंडस्ट्रीज के  सभी सम्मानित  सदस्यों का हृदय से आभार प्रकट किया की समय रहते सभी सुधीजनों ने जागरूकता का परिचय देते हुए अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाहन किया तथा चाईबासा चेंबर की तेरहवीं वार्षिक आमसभा में अनूप सुल्तानिया द्वारा असंवैधानिक रूप से स्वहित में पंजीकृत ट्रस्ट का मुक्त कंठ से पुरजोर विरोध करते हुए  उक्त ट्रस्ट को भंग करने के प्रस्ताव को एक मत होकर समर्थन किया  साथ ही चौदहवीं वार्षिक आमसभा में सम्मानित सदस्यों ने पूर्व अध्यक्ष  अनिल  खिरवाल एवं पूर्व अध्यक्ष नितिन प्रकाश को पूर्ण बहुमत से अधिकृत करते हुए  चाईबासा चेंबर के सदस्यों द्वारा संगृहीत कोष जो तथाकथित मुख्य ट्रस्टी द्वारा हस्तांतरित किया गया है को अविलंभ चाईबासा चेंबर के मूल खाते में वापस लेन हेतु जिम्मेदारी सौंपी चाईबासा चेंबर  अध्यक्ष ने दोनों पूर्व अध्यक्षों अनिल खिरवाल एवं नितिन प्रकाश के प्रति विशेष आभार प्रकट किया की उन्होंने सम्मानित सदस्यों द्वारा सौंपी गयी जिम्मेदारी पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सदस्यों द्वारा संगृहीत कोष को चाईबासा चेंबर के मूल खाते में वापस लाने का कार्य सुनिश्चित किया अब चाईबासा चेंबर का कोष पूर्णतः सुरक्षित है । 

हास्यास्पद तथ्य तो यह है की जिन व्यक्तियों को चाईबासा चेंबर की कार्यसमिति ने सर्वसम्मति से निष्काषित किया हो एवं उसके साथ दीपक शर्मा नामक व्यक्ति तथा धूर्त व्यक्तियों का समूह जो चाईबासा चेंबर के सदस्य ही नहीं है खुद की ताजपोशी कर चाईबासा चेंबर के  सदस्यों द्वारा संगृहीत कोष को खुद की सम्पति समझ कर आपस में बन्दर बाँट करने के उद्देश्य से अवांछित रूप से परेशान है और लगातार अपनी स्वार्थ सिद्धि विशेष कर आगामी नगर परिषद् चुनाव के मद्देनजर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने हेतु चाईबासा चेंबर एवं इसके पदाधिकारियों के विरुद्ध नित नए अनर्गल बयानबाज़ी , तथ्यविहीन आरोप ,व्यक्तिगत टिप्पणी , निराधार आक्षेप लगाना जैसे तुच्छ और गिरे हुए हथकंडे अपना रहे है ।

उक्त के आलोक में अध्यक्ष संजय चौबे ने स्पष्ट किया की चाईबासा चेंबर के सभी सम्मानित सदस्यों द्वारा संग्रहित कोष सुरक्षित हाथों में है जिसकी लिखित एवं मौखिक जानकारी प्रत्येक वर्ष वार्षिक आमसभा में सभी 490 सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत की जाती है साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है की जिले के सर्वोच्च व् सबसे बड़ी व्यवसायिक संगठन चाईबासा चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (ट्रस्ट निबंधन संख्या CHAI/210 /BK4 /6 ) दिनांक 21 मार्च 2025 फेडरेशन ऑफ़ झारखण्ड चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज रांची द्वारा मान्यता प्राप्त है के संविधान के तहत चाईबासा चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की सभी प्रकार की साख ,ख्याति ,परिसंपत्तियां ,निधि आदि चाईबासा चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की सम्पति है इसका नाम, साख आदि का दुरूपयोग किसी अन्य व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा नहीं किया जा सकता है चाईबासा चेंबर एकजुट है तथा इसके  सभी सुधि 490 सदस्य सजग एवं जागरूक है आवश्यकता पड़ने पर चाईबासा चेंबर वैसे व्यक्ति अथवा समूह पर आवश्यक क़ानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु बाध्य होगा ।

Post a Comment

Do live your Comments here! 👇

Previous Post Next Post