झारखण्ड में कांग्रेस मुक्त सरकार देखने को मिल सकती है, हां यह चर्चा हकीकत में बदल सकती हैः राजनीतिक सुत्र
राज्य का विकास के लिए डबल इंजन की सरकार बनाने के लिए सत्ता पक्ष के अधिकांश विधायक सहमत हैं। राजनीतिक सुत्र
उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में झारखण्ड में कांग्रेस मुक्त सरकार बनाने का ड्राम का रिहल्सल चल रहा है
हेमन्त सोरेन की नाराज़गी को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है विपक्ष
santosh verma
Chaibasa: राजनीतिक सूत्रों के अनुसार बिहार चुनाव से पहले ही चर्चा हो रही थी कि बिहार चुनाव में NDA की सरकार बनते ही झारखण्ड में कांग्रेस मुक्त सरकार बनाने की रणनीति को अमली जामा पहनाने की कोशिश शुरू कर दी जाएगी, उसका शोर राजनीतिक गलियारे में सुनाई देने लगी है। हां भाजपा अब झारखण्ड में कांग्रेस को देखना नहीं चाहती है। राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि नए साल में नए सरकार जनता के सामने होगी, यानी भाजपा झामुमो या एक तिहाई कांग्रेस के विधायक टूट कर नई पार्टी अर्थात महाराष्ट्र का शिंदे की राजनीतिक घटना झारखण्ड की धरती में देखने को मिल सकती है। हां यह सारा ड्रामा या खेल का रिहल्सल उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में चल रहा है, जिसकी स्क्रिप्ट दिल्ली से लिखा कर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर तक पहुंच चुकी है।
कांग्रेस पार्ट के ST कोटा के ईसाई मिशनरी से सम्बन्धित वाले विधायक भाजपा में जाने से कतराते हैं, वहीं नई पार्टी बनाने में सहमत नज़र आतें हैं, लेकिन कांग्रेस के विधायक आज हेमन्त सोरेन को नीतीश कुमार का दूसरा रूप में देख रही है। राज्य की आर्थिक बदहाली को देखते हुए डबल इंजन की सरकार बनाने की इच्छा प्रायः अधिकांश विधायक रखते हैं। सत्ता पक्ष के मुख्य घटक दल झामुमो इन दिनों कांग्रेस आलाकमान से काफी नाराज़ बताए जा रहे हैं बिहार चुनाव में कांग्रेस का नकारात्मक रवैया अपनाए जाने से झामुमो के अन्दर कांग्रेस के प्रति विरोध शुरू हो चुका है।
सूत्रों की माने तो बिहार चुनाव में जनता के बीच गिरते साख यानि पार्टी की स्थिति धरातल पर चले जाने से झामुमो आलाकमान भी सकते में हैं। दूसरी ओर झारखण्ड सरकार में कांग्रेस के अधीन मंत्रालय में अराजकता फैलने और सभी राजनीतिक दलों एवं विधायकों के बीच कांग्रेस के दो मंत्री के खिलाफ विरोध के स्वर निकलने से हेमन्त सोरेन काफी परेशान एवं नाराज़ होने की बात कही जा रही है।
