झामुमो–कांग्रेस गठबंधन सरकार सारंडा पर अपनी गलती छुपाने के लिए भ्रम फैला रही हैंः पूर्व सांसद गीता कोड़ा”

 झामुमो–कांग्रेस गठबंधन सरकार सारंडा पर अपनी गलती छुपाने के लिए भ्रम फैला रही हैंः पूर्व सांसद गीता कोड़ा”

santosh verma

Chaibasa ःसारंडा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा लगातार भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन जनता अब स्पष्ट रूप से समझ चुकी है कि क्षेत्रीय दलों को आदिवासी–मूलवासी समाज की वास्तविक चिंता नहीं है। भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है, जो हर मुद्दे पर जनहित को सर्वोपरि रखती है।

पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि झामुमो बताए कि जब सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया, तब एक भी झामुमो–कांग्रेस विधायक, सांसद या मंत्री ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? हजारों आदिवासी–मूलवासी खुलकर इसका विरोध कर रहे थे, फिर भी हेमंत सरकार की छह मंत्रियों की टीम उनकी बात रखने में असफल रही। यदि सरकार सचमुच सारंडा के लोगों के साथ थी, तो किस दबाव या परिस्थिति में कैबिनेट से यह प्रस्ताव पारित कराया गया?

भाजपा ने आरोप लगाया कि जब लोगों की स्पष्ट मांग थी कि रिज़र्व फॉरेस्ट/सेंचुरी का निर्णय रद्द किया जाए, तब झामुमो और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि चुप क्यों रहे? यह जनभावना का प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि केवल दिखावा था। आज जब जनता विरोध में खड़ी है, तब झामुमो अपने ही फैसलों से घिर गया है।

भाजपा ने कहा कि झामुमो–कांग्रेस गठबंधन सरकार सारंडा के लोगों को उनके मौलिक अधिकार देने में विफल रही है। चुनाव के दौरान आदिवासी–मूलवासी का नाम लेना और सत्ता में आने के बाद उनकी आवाज़ दबाना झामुमो की राजनीतिक संस्कृति बन चुकी है।इस स्थिति को उन्होंने “मीठा-मीठा हप्प, कड़वा-कड़वा थू-थू” करार दिया।भाजपा ने यह भी कहा कि सरकार का गैर-जिम्मेदाराना रवैया नो-एंट्री समस्या से लेकर थैलेसीमिया मरीज को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने तक अनेक मामलों में उजागर हुआ है।

सारंडा पर झामुमो के आरोप केवल ध्यान भटकाने की साजिश हैं।भाजपा ने मांग की है कि गठबंधन सरकार जनभावना के अनुरूप सारंडा के लोगों को उनके अधिकारों की गारंटी दे और सेंचुरी प्रस्ताव पर अपनी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।

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