तत्कालीन सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी के लापरवाही और भ्रष्टाचार कार्यशैली से सरकार के लचर स्वास्थ्य सेवा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुत्र
तत्कालीन एवं निलम्बित सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी ने अपने कार्यकाल में विभाग से प्राप्त स्थापना मद एवं अन्य स्वास्थ्य मद की राशि को डीएमओ की मिलीभगत से भारी लुट की है, एसीबी से जांच कराने की मांगः सूत्र
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी से इस्तीफे की मांग की
पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने भी स्वास्थ्य विभाग की लचर वयवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है
santosh verma
Chaibasa ः तत्कालीन सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी के कार्यकाल की वित्तीय जांच होने से जेल तक जा सकते हैं। हां इसलिए की मांझी अपने डीएमओ के साथ मिलकर स्थापना मद एवं अन्य स्वास्थ्य योजना की राशि की जमकर लूट की है। प्रत्येक प्रभारी इस लुट में शामिल रहने की बात कही जा रही है। अपने चहेतों से बिना टेंडर सिविल कार्य कराने और दवा साथ ही अन्य स्वास्थ्य सामग्री की आपूर्ति में भारी कमिशन वसूली किए जाने की भी जोरों की चर्चा है। इससे पूर्व भी मांझी के विरुद्ध भ्रष्टाचार कार्यशैली के खिलाफ मामला उठा था, लेकिन अपनी ऊंची पहुंच और पैरवी से सभी जांच को ठंडे बस्ते में डलवा देते हैं। विभागीय मंत्री इरफ़ान अंसारी के भाई इमरान अंसारी का नाम बेच कर अपने जांच पर पर्दा डालते रहते हैं। सूत्रों के अनुसार विभागीय मंत्री के भाई इमरान अंसारी का वरदहस्त प्राप्त होने की बात कही जा रही है। हाल की घटना से स्पष्ट हो गया है कि मांझी सिर्फ स्वास्थ मद की राशि की लुट में गंभीर और मस्त रहें, उन्हें अपनी असल स्वास्थ्य जिम्मेदारी निभाने की कभी गंभीरता नहीं रही। मांझी कम समय में जिला के सबसे भ्रष्ट कार्यशैली वाले पदाधिकारी के रूप में पहचान बनाने में सफलता हासिल कर ली है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी से बहुत जल्द जिला के सामाजिक संगठन मांझी को निलंबित करने से ज्यादा जरूरी है उनको बर्खास्त करने की मांग करेंगे। आज मांझी जैसे पदाधिकारी के कारण सरकार की बदनामी हो रही है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा केवल दो लाख रुपये मुआवजा की घोषणा करना अमानवीय है और पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने एचआईवी पीड़ित मरीजों के संबंध में डीएस डॉ. शिवचरण हांसदा एवं नवनियुक्त प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. भारती गौरेती मिंज से मुलाकात कर विस्तृत जानकारी ली। श्री कोड़ा ने यह जानने का प्रयास किया कि आखिर किन कारणों से बच्चे एचआईवी ग्रसित हुए। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सरकार को कई आवश्यक मेडिकल सुविधाओं के लिए पत्राचार किया गया है, परंतु अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
श्री कोड़ा ने कहा कि जब चाईबासा ब्लड बैंक का लाइसेंस पिछले कई वर्षों से नवीनीकृत ही नहीं हुआ है, तो यह गंभीर प्रश्न उठता है कि अब तक किस स्तर की जांच प्रक्रिया के तहत मरीजों को रक्त चढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्लड की त्रिस्तरीय जांच आवश्यक है, जिसकी अस्पताल में पूरी तरह कमी है। यह घटना केवल अस्पताल और मेडिकल स्टाफ की लापरवाही नहीं, बल्कि सरकार की गहरी उदासीनता को भी दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी केवल बयानबाज़ी में लगे हैं, जबकि अस्पताल की जमीनी सुविधाएं चरमरा चुकी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा केवल दो लाख रुपये मुआवजा की घोषणा करना अमानवीय है और पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है। श्री कोड़ा ने मांग की कि पूरे राज्य में ब्लड बैंकों की जांच हो और दोषियों के खिलाफ न्यायिक जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।


