बंद की सफलता से घबराकर सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आज पोस्ट ऑफिस चौक पर भाजपा नेताओं का पुतला दहन कर जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि“ग्रामीणों की मांग पूरी तरह उचित है। सरकार को पहले जनता की बात सुननी चाहिए थी, लाठी नहीं चलानी चाहिए थी। निर्दोष ग्रामीणों की रिहाई, घायलों का इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
संतोष वर्मा
Chaibasa ःपश्चिमी सिंहभूम जिले में बाईपास सड़क पर लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने हेतु ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों द्वारा नो-एंट्री लागू करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा रहा था। परंतु प्रशासन ने रात के अंधेरे में आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, जिससे अनेक लोग घायल हुए। 74 लोगों के ऊपर नामजद 500 से अधिक लोगों पर अज्ञात मुकदमा दर्ज किया गया और 16 से अधिक निर्दोष ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया। यह झारखंड बनने के बाद आदिवासी समाज पर हुई सबसे गंभीर पुलिसिया कार्रवाई मानी जा रही है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार और प्रशासन की इस दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ भाजपा और सामाजिक संगठनों ने झारखंड बंद का आह्वान किया, जिसे जनता का अपार समर्थन मिला। बंद की सफलता से घबराकर सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आज पोस्ट ऑफिस चौक पर भाजपा नेताओं का पुतला दहन कर जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया। उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन देने के क्रम में भी सामाजिक संगठनों के प्रति प्रशासन का व्यवहार भेदभावपूर्ण और असहनीय रहा, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है।
यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि जब इस जिले के सांसद, सभी विधायक, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री स्वयं आदिवासी समाज से हैं, तब भी आदिवासियों की जायज़ मांगों की अनदेखी की जा रही है और प्रशासन उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबा रहा है। यह सत्ता के अहंकार और जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि“ग्रामीणों की मांग पूरी तरह उचित है। सरकार को पहले जनता की बात सुननी चाहिए थी, लाठी नहीं चलानी चाहिए थी। निर्दोष ग्रामीणों की रिहाई, घायलों का इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
— जारीकर्ता:
जितेंद्र नाथ ओझा
पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा मीडिया प्रभारी
