Saraikela: सरायकेला में सिविल कोर्ट और चांडिल उप-न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन; 6,784 मामलों का हुआ निपटारा, 1.55 करोड़ रुपए की राशि वसूली


सरायकेला: आज झारखंड के 24 जिलों में राष्ट्रीय लोक अदालत-सह-पूर्व सैनिक, रक्षा कर्मियों एवं उनके आश्रितों के लिए समर्पित कानूनी सेवा केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री तरलोक सिंह चौहान एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री सुजीत नारायण प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा द्वारा किया गया।

इसके अतिरिक्त, रांची, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला एवं पूर्वी सिंहभूम में पूर्व रक्षा कर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए कानूनी सेवा क्लीनिकों का शुभारंभ किया गया, जिससे इस वर्ग तक न्यायिक सहायता की पहुँच और सशक्त हुई।


सरायकेला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सिविल कोर्ट सरायकेला एवं उप-न्यायालय चांडिल में लोक अदालत का आयोजन किया गया। माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए के आदेशानुसार कुल सात पीठों का गठन किया गया।

इस अवसर पर श्री रामाशंकर सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए ने सभा को संबोधित करते हुए लोक अदालत की त्वरित, सुलभ एवं सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान प्रक्रिया की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे: श्री बिरेश कुमार (परिवार न्यायालय), श्री चौधरी एहसान मोइज़, श्री बी.के. पांडेय, श्री दीपक मलिक (एडीजे), सुश्री लूसी सोजेन टिग्गा (सीजेएम), श्री तौसीफ मेराज (सचिव, डीएलएसए), सुश्री अनामिका किस्कू (वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश), श्री आशीष अग्रवाल (एसडीजेएम) एवं सुश्री धृति धैर्य (जेएम)।


लोक अदालत की प्रमुख उपलब्धियाँ:

कुल 6,784 मामलों का निपटारा किया गया। लगभग ₹1.55 करोड़ की राशि वसूली गई।

वन, विद्युत, उत्पाद, एमएसीटी, आपराधिक संधारणीय मामले, पुलिस अधिनियम, मोटर वाहन अधिनियम, दीवानी विवाद एवं ऋण वसूली से संबंधित मामलों का समाधान हुआ।

कुछ प्रेरणादायक उदाहरण:

दो बच्चों की विधवा को बैंक ऋण से राहत मिली। एक वृद्ध व्यक्ति को गरीबी के कारण ऋण चुकाने में असमर्थता पर समझौते के माध्यम से राहत दी गई। कई पारिवारिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ।

इस अवसर पर डीएलएसए अध्यक्ष द्वारा कौशल विकास योजना के तहत चेक वितरित किए गए एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए, जिससे सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला।

राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली की प्रभावशीलता को सिद्ध किया, विशेषकर कमजोर वर्गों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के लिए न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने में।

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