सदर अस्पताल सभागार में असैनिक शल्य चिकित्सा सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में Mass Drug Administration (MDA-IDA 2025) को लेकर हुई बैठक
डॉ. मांझी ने मीडिया से आग्रह किया कि वे अपने समाचार माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान के प्रति जागरूक करें कि हर व्यक्ति दवा स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाए
डॉ. सिंह, ने कहा कि फाइलेरिया मुक्त झारखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक
santosh verma
Chaibasaःगुरूवार सदर अस्पताल सभागार में असैनिक शल्य चिकित्सा सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में Mass Drug Administration (MDA-IDA 2025) दिनांक 10 से 25 अगस्त 2025 फलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सम्बंध में प्रेस ब्रेफिंग के माध्यम से जानकारी दिया गया कि फाइलेरिया जैसी गंभीर और विकलांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी को समाप्त करने के उद्देश्य से झारखंड सरकार द्वारा MDA-IDA 2025 अभियान चलाया जा रहा है। 10 अगस्त से चलने वाले कार्यक्रम की जानकारी हेतु जिला में एक मीडिया ब्रीफिंग का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी भीबीडी झारखण्ड, जिले के सिविल सर्जन डॉ. सुशांतों कुमार मांझी, प्रवीण कुमार राज्य वित्त सलाहकार भीबीडी, अविनाश कात्यायन पिरामल स्वस्थ्य, अखिलेश पटेल WHO, जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ. मीना कलुन्डिया, जिला भीबीडी सलाहकार शशिभूषण महतो, सुरजीत गोयल एवं एफएलए मनीष कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
*MDA-IDA कार्यक्रम*
सर्व जन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत सभी योग्य व्यक्तियों को फाइलेरिया रोधी तीन दवाएं - डीईसी, एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन निर्धारित खुराक में निःशुल्क खिलाई जाती हैं, ताकि उनके शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवियों को समाप्त किया जा सके।
*जिले में अभियान का लक्ष्य और व्यवस्था*
★ 1573723 लक्षित लाभुकों
★ 5106 प्रशिक्षित दवा प्रशासक,
★ 2553 बूथ
★ 511 पर्यवेक्षक
डॉ. मांझी ने यह भी स्पष्ट किया किः
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, एवं गंभीर बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी।
1 से 2 वर्ष के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल दवा दी जाएगी।
दवा खाली पेट नहीं खानी चाहिए।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया आदि रोगों से ग्रसित लोगों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
दवा लेने के बाद की प्रतिक्रिया
डॉ. मांझी ने बताया कि आमतौर पर दवा से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है, लेकिन यदि किसी को उल्टी, चक्कर, पेट दर्द, खुजली या बुखार जैसी शिकायत होती है, तो इसका अर्थ यह है कि उनके शरीर में पहले से फाइलेरिया के परजीवी मौजूद थे, जो दवा खाने के बाद मर रहे हैं। ये लक्षण कुछ ही समय में स्वतः समाप्त हो जाते हैं।आपात स्थिति के लिए जिले में 16 प्रशिक्षित रैपिड रिस्पांस टीमों को तैनात किया गया है, जो किसी भी गंभीर लक्षण पर तुरंत इलाज की सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
फाइलेरिया की भयावहता और बचाव
डॉ. कलुन्डिया ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है, जो लिंफ सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। इससे हाइड्रोसील, लिम्फोडिमा (हांथीपांव), काइलूरिया (दूधिया पेशाब) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार 3 वर्षों तक हर वर्ष दवा का सेवन करने पर, फाइलेरिया का पूरी तरह से उन्मूलन किया जा सकता है। शशिभूषण महतो ने बताया कि जिले में 572 उच्च जोखिमता वाले गांवों की पहचान की गयी है जहाँ मिशन एम.डी.ए. स्क्वाड के माध्यम से सभी योग्य व्यक्तियों को दवा सेवन करवाने की रणनीति बनाई गयी है यह टीम मुखिया की अध्यक्षता में गांवों में सभी को जागरूक कर दवा सेवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे 2027 तक फ़ाइलेरिया मुक्त पंचायत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा.
मीडिया की भूमिका और अपील
डॉ. मांझी ने मीडिया से आग्रह किया कि वे अपने समाचार माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान के प्रति जागरूक करें कि हर व्यक्ति दवा स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाए। साथ ही अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक सन्देश लोगों तक न पहुचाएं, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन, और सुनियोजित कार्ययोजना के साथ हम लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
डॉ. सिंह, ने कहा कि फाइलेरिया मुक्त झारखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि गाँव के अंतिम व्यक्ति तक इस अभियान की पहुँच सुनिश्चित की जाए।

