Chaibasa/Jagannathpur: जैतगढ़ के मुन्डुई नदी घाट पर दर्दनाक हादसा, एक बाल मजदुर की मौत ट्रैक्टर से कुचल कर हुई

बगैर पोस्टमार्टम के ही शव को दफनाया, जगन्नाथपुर पुलिस मौन...


चाईबासा/संतोष वर्मा: जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के जैतगढ़ ओपी अन्तर्गत मुन्डुई नदी के अवैध बालू घाट पर 6 अप्रैल को एक नाबालिग मजदुर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मुन्डुई गांव निवासी मनोहर सरदार उर्फ डम्फर (उम्र लगभग 16-17 वर्ष), पिता पाईको सरदार के रूप में हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह हादसा बालू लदे ट्रैक्टर के चक्के के नीचे दब जाने से हुआ।

पुलिया के पास हादसा, चालक मृतक का था पिता

सूत्रों के अनुसार, जिस ट्रैक्टर से हादसा हुआ वह जैतगढ़ के एक कुख्यात बालू माफिया का बताया जा रहा है। ट्रैक्टर का चालक मुन्डुई गांव का ही रहने वाला है और मृतक के परिवार से नजदीकी यानी मृतक का पिता बताया जा रहा है। इस घटना के बाद से पूरा इलाका आक्रोशित है, लेकिन खुले तौर पर कोई बोलने को तैयार नहीं है। जब इस मामले की पुष्टि हेतु जगन्नाथपुर थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। प्रशासन की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जैतगढ़ क्षेत्र के मुन्डुई और गुमुरिया घाट इन दिनों अवैध बालू तस्करी का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। खनन विभाग की आंखों के सामने दिन-रात बालू की तस्करी हो रही है। दर्जनों ट्रैक्टरों से बालू उठाव कर आसपास के क्षेत्रों में स्टॉक किया जा रहा है और वहां से जेसीबी मशीन द्वारा हाईवा में भरकर बालू को विभिन्न जगहों पर भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है, कि इस अवैध कारोबार में चार-पांच प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग शामिल हैं। बालू माफिया थाना और खनन विभाग के साथ मजबूत संबंध रखते हैं। यदि वाहन पकड़े भी जाते हैं तो प्राथमिकी दर्ज नहीं होने दी जाती और खनन विभाग से मामूली फाइन करवाकर वाहन छुड़ा लिया जाता है।

मुन्डुई नदी पर बना पुल जो झारखंड-ओडिशा को जोड़ने वाली जीवनरेखा है, वह भी बालू तस्करी की वजह से खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पुल के आस-पास से बालू का अत्यधिक उठाव होने के कारण इसकी नींव कमजोर हो गई है, जिससे भविष्य में पुल के टूटने की आशंका प्रबल हो गई है।बालु तस्करी में लगे कुछ ट्रैक्टर मालिकों ने खुलासा किया कि बालू माफिया हर ट्रैक्टर मालिक से प्रतिमाह 5,000 की एकमुश्त राशि वसूलते हैं। हाईवा से इससे भी अधिक राशि ली जाती है। यदि कोई मालिक पैसे देने में असमर्थ होता है, तो उसका ट्रैक्टर पकड़वा दिया जाता है। जेसीबी मशीन और मजदूरों की मदद से ट्रैक्टर और हाईवा में बालू लोड कर रात में चलाया जाता है।

घटना के बाद से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मृतक को न्याय मिले और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, बालू घाट की अवैध तस्करी पर तत्काल रोक लगाई जाए। मुन्डुई नदी घाट की यह घटना न सिर्फ एक किशोर की मौत की दुखद त्रासदी है, बल्कि यह दर्शाती है कि किस प्रकार बालू माफियाओं का दबदबा प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बना चुका है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जा सकते हैं।

पैसे और प्रशासनिक दबाव में दफना दी गई लाश, मामला दबाने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद बालू माफियाओं ने अफरा-तफरी मचा दी। मृतक के परिवार को पैसे और प्रशासनिक दबाव का भय दिखाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। सूत्रों का दावा है कि माफियाओं ने पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार गांव में ही दफनाने के लिए मजबूर कर दिया। इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। जबकी तूरली गांव का मानकी दीपक लागुरी नें घटना की सूचना पाकर घटना स्थल जाकर देखने की भी चर्चा है।

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