सरायकेला/दीपक कुमार दारोघा: झारखंड जहां छऊ भी योगा सिखाता, अब विकास के लिए लोगों के नजर में चुनावी मुद्दा बन चुका है। छऊ को यूनेस्को ने 2010 में इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज घोषित किया है। छऊ कला को विश्व स्तर पर पहुंचाने वाले सात कलाकार राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से अलंकृत हो चुके हैं। और झारखंड का नाम रोशन किया है। इसके बावजूद मदर ऑफ़ छऊ एरिया सरायकेला विकास से दूर है और अपने अधिकार से वंचित है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2019 को रांची प्रभात तारा मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग की मेहता को बताते हुए कहा था कि झारखंड में भी जो छऊ नृत्य होता है उसमें आसनो एवं मुद्राओं को व्यक्त किया जाता है। लेकिन यह भी सत्य है आधुनिक योग की जो यात्रा है वह देश के ग्रामीण आदिवासी अंचल में अभी उस तरह नहीं पहुंची जैसी पहुंचनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा था कि झारखंड के नाम से ही यह वन प्रदेश है। प्रकृति के करीब है। योग व प्रकृति का ताल-मेल इंसान को अलग ही एहसास कराता है। अब यह कहना उचित होगा कि कला संस्कृति से भरा झारखंड प्रदेश में पर्यटन की असीम संभावना है। ऐतिहासिक घटना के दृष्टि से भी यह समृद्ध है।
लोग अब तक यह नहीं जानते हैं कि रांची शहीद चौक का नाम कैसे पड़ा। यह 1857 की क्रांति से जुड़ा है। जहां पोडाहाट के राजा अर्जुन सिंह ने चाईबासा जेल ब्रेक कांड में क्रांतिकारी सैनिकों को मदद की थी। बाद में अंग्रेज के दबाव में 100 सैनिकों को अंग्रेज के हवाले कर दिया था। इन सैनिकों पर केस चला और 40 को दोषी मानते हुए अंग्रेज ने उन्हें रांची शहीद चौक में फांसी पर चढ़ा दिया था।
कौन थे वह जिन्हें फांसी पर चढ़ाया गया। इन शहीदों का जिक्र तक नहीं होती।
कला सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक घटना से भरा झारखंड प्रदेश मे रांची से सीकेपी,चाईबासा, सरायकेला, राजनगर, चांडिल होते हुए वृहत पर्यटन कॉरिडोर बन सकता है। और पर्यटन गाइड के रूप में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सकता है। मगर जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र की समस्या विधानसभा में उठाने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। जनता इसी दर्द को लिए आज भी चुनाव में अच्छे प्रतिनिधि की तलाश कर रही हैं।
इधर 5 साल के दौरान हेमंत सरकार ने छऊ नृत्य कला के विकास के प्रति विशेष ध्यान नहीं दिया। अब तो यह स्थिति है कि राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला के सभी कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। अब तो यह लोगों के लिए चुनावी मुद्दा बन चुका है। सरायकेला विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी जवाहरलाल माहली ने पिछले दिनों मीडिया से कहा कि झारखंड राज्य बनने के बाद भी लोग बुनियादी समस्या से परेशान है।
बुनियादी समस्या से आदिवासी मूलवासी जूझ रहे हैं। सरायकेला छऊ नृत्य कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसके बावजूद कलाकारों की स्थिति दयनीय है। पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है। छऊ कला, कलाकार, पर्यटन विकास के संबंध में पूर्व सीएम चंपाई सोरेन यह कहते नहीं थकते की सरायकेला की पर्यटन विकास,सौंदर्यीकरण के लिए पहल की गई थी। प्रोजेक्ट भी बनी। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने राशि की स्वीकृति नहीं दी।
पूर्व सीएम चंपाई सोरेन झामुमो त्याग कर अब सरायकेला विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार है। इधर भाजपा त्याग कर गणेश माहली सरायकेला विधानसभा सीट से झामुमो (इंडिया गठबंधन) उम्मीदवार हैं। और भाजपा उम्मीदवार श्री चंपाई सोरेन को हराने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए वह जनता से अपील भी कर रहे हैं कि एक बार मौका दें। जनता है कि उम्मीदवारों को भांप रही है। यहां तक कि रोज चाय स्टलों में चाय की चुस्की के साथ लोग इन दोनों नेताओं की चर्चा करते नहीं भूलते हैं।
लोग क्षेत्र का बेरोजगारी समस्या, कला नगरी सरायकेला की भविष्य को लेकर चिंतित हैं। और सही नेता की तलाश में है। सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में कुल 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान हैं। 13 नवंबर को मतदान होगी। कौन बनेगा मुकद्दर का सिकंदर समय तय करेगा। फिलहाल हाट बाजार, गली, मोहल्ला में लोगों के बीच हो रही चुनावी चर्चा में छऊ भी है।
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