आजसू के प्रत्याशी अपने ही घटक दल भाजपा का कोपभाजन बनने की स्थिति में खड़ी दिख रही है

मलखान सिंह के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से ईचागढ़ में त्रिशंकु लड़ाई होने की संभावना से इंकार नहीं


Desk/संतोष वर्मा: ईचागढ़ विधानसभा आजसू के खाते में जाने से भाजपा अपने ही लोगों से घिरती नजर आ रही है. भाजपा के कई दिग्गज इस सीट शेरिंग से चारों खाने चित हो गए हैं. सुदेश महतो की विट्टो के आगे भाजपा इस सीट पर नतमस्तक होते दिखी. सबसे बड़ा झटका मलखान सिंह को लागा है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के द्वारा टिकट दिलवाने के शर्त पर पार्टी जॉइन करवाए थें, ऐसे बाबूलाल कर भी किया सकते थे, सुदेश के आगे सब बौने साबित हो गए हैं.

अन्तिम समय में मलखान के पास अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाए रखने के लिए चुनाव मैदान में उतरना मजबूरी है,आज मरने जीने जैसे हालात में खड़े हो गए हैं. सूत्रों के अनुसार भाजपा के सारे सम्भावित उम्मीदवार एक जुट हो कर निर्दलीय प्रत्याशी मालखन के पक्ष में मदद करने की ख़बर राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है, ऐसे में आजसू प्रत्याशी हरिलाल महतो की जीत पर ग्रहण लग सकता है. आजसू को सीट मिलने और भाजपा में अंतर्कलह और विरोध शुरू हो का लाभ झामुमो के प्रत्याशी को मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

मधु गोराई के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भाजपा के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी मलखान सिंह के पक्ष में जा सकते हैं. सबसे अहम यह है कि दिवंगत साधु चरण महतो की पत्नी को पार्टी से काफी निराशा हाथ लगी है, सूत्र बताते हैं कि वो अपने आप को सम्भाल नहीं पा रहीं हैं, एक झटके में साधु दा के सपने को पार्टी के फैसले से चकनाचूर कर दिया गया है. साधु दा के घर पर गम और गुस्सा दोनों को देखा जा रहा है.

अब देखना है कि अपने ग़म और गुस्सा के साथ अपमान का बदला किस रूप में लेने की रणनीति बनाई जा रही है. भाजपा एक साथ अपनी पार्टी के रीढ़ माने जाने वाले तीन वफादार सिपाही, कार्यकर्ता को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने और खास कर हौसला को तोड़ने का काम किया है. भाजपा के घटक दल आजसू प्रत्याशी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. सबिता महतो या उनकी बेटी का किस्मत भी आजसू और भाजपा की लडाई पर निर्भर है.

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