हो" भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की माँग के समर्थन में जंतर-मंतर नई दिल्ली में निर्धारित धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर निकाली रैली


चाईबासा: आगामी 14 सितम्बर को "हो" भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की माँग के समर्थन में जंतर-मंतर नई दिल्ली में निर्धारित धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आदिवासी "हो" समाज युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरूवा के नेतृत्व में कूंटा एवं बारी पोखरी गाँव के  ग्रामीणों के बीच  प्रचार-प्रसार किया गया। आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से समाज की पुरानी माँग "हो" भाषा की संवैधानिक मान्यता के बारे में लोगों को जानकारी दिया गया। इस क्षेत्र में चाहे कोई भी समुदाय से हों मगर दैनिक जीवन में प्रतिदिन प्रयोग की जाने वाली भाषा के रूप में सम्मान दिलाने जैसी राष्ट्रीय आंदोलन कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए लोगों से सामाजिक, आर्थिक और सांगठनिक सहयोग माँगा गया। 


आठवीं अनुसूची के मामले में दिल्ली में पच्चास से सौ के आस-पास भाषा प्रेमी युवाओं और भाषा के आंदोलनकारियों के लिए संवैधानिक और संसदीय कार्यप्रणाली एवं उसके प्रक्रियाओं पर जनजागरूकता हेतु 13 सितम्बर को सेमिनार आयोजन के प्रस्तावना के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी दिया गया। इसके अलावे अन्य सामाजिक जागरूकता की दिशा में डायन प्रथा, कल्याणकारी योजना, श्रम नियोजन संबंधी स्वयंसेवी संगठन की ओर से हैंडविल बाँटा गया।


इस अवसर पर आदिवासी "हो" समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, लेबा गागराई, मुचिया बारी, मंगल देवगम, टारू देवगम, हरिचरण खंडाईत, सतीश खंडाईत, गोनो डुंगुवा, भोंञ डुंगुवा, डुकनी गोप, महाती गोप, संजय गोप, बोदो गोप, डिबर गोप, अविनाश गोप, कुंञ बिहारी खंडाईत, गोसा खंडाईत, गणेश खंडाईत आदि लोग मौजूद थे।

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