जेएमएम के केंद्रीय कमिटी के द्वारा सिंहभूम लोकसभा सीट से घौषित प्रत्याशी को जिला कमिटी के लोग प्रत्याशी बदलने की मांग कर रहें है

अब देखना है कि पार्टी के घोषित उम्मीदवार जोबा मांझी को बदलवाने में हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन को कैसे मनाते हैं


चाईबासा : जेएमएम के केंद्रीय कमिटी के द्वारा सिंहभूम लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किए जाने के चौबीस घंटे में जिला कमिटी के लोग प्रत्याशी बदलने की मांग की जाने लगी है, यहां तक हो आदिवासी महासभा को कुछ लोग से हो आदिवासी प्रत्याशी देने की मांग करवा दिए हैं, ऐसा लग रहा है कि किसी दूसरा पक्ष गीता कोड़ा को लाभ पहंचाने के लिए जोबा मांझी को बदलने की दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।आश्चर्य की बात यह है कि जोबा मांझी को प्रत्याशी बनाए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को नहीं थी, साथ ही कल्याण मंत्री दीपक बिरुआ को भी नहीं है।

सूत्रों की माने तो हेमन्त सोरेन के सहमति और कल्पना सोरेन समर्थन के बाद ही जोबा मांझी को प्रत्याशी बनाया गया है, फिर जेएमएम में इतनी जुर्रत और हिम्मत कैसे और किस के सह पर प्रत्याशी बदलवाने की कोशिश हो रही है। जिला कमिटी के सचिव सोनाराम देवगम और अध्यक्ष सुखराम उरांव का जोबा मांझी के प्रति विरोध और निरल पूर्ति को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग मंहगा पड़ सकता है। जिला कमिटी के दिग्गज नेता निरल पूर्ति का भी विरोध में हैं, सूत्रों के अनुसार निरल पूर्ति ईसाई मिशनरी हो चुके हैं,हो आदिवासी नाम मात्र हैं, इसलिए जिला कमिटी हो के नाम पर मात्र सोना देवगम ही है, जिसपर कोई विचार नहीं कर रहा है।

सूत्रों की माने तो दशरथ गहराई अपने पिछड़ने का लाभ निरल पूर्ति को पहुंचाने के लिए चंपई सोरेन को आगे बढ़ाया है। अब देखना है कि पार्टी के घोषित उम्मीदवार जोबा मांझी को बदलवाने में हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन को कैसे मनाते हैं। जोबा मांझी के बदले निरल पूर्ति को प्रत्याशी बनाए जाने की कोशिश को एक साजिश के तहत भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला बताया जा रहा है। 

सुत्र के अनुसार सुखराम उरांव और दशरथ गगराई की टकराहट के कारण हेमन्त सोरेन की सहमति के बाद पार्टी महासचिव ने जोबा मांझी को प्रत्याशी घोषित किया है। सूत्रों के अनुसार जेएमएम का एक गुट भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासी समाज को बांटने का काम कर रही है। जेएमएम के अंदरूनी गुटबाजी का लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिल सकता है।

जिला कमिटी के द्वारा दशरथ गगराई को बाहरी होने का विरोध करना, हो आदिवासी के नाम पर सुखराम उरांव का विरोध किया जाना और अब हेमंत सोरेन के सहमति से जोबा मांझी को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध करना जेएमएम के अंतर्कलह को उजागर करता है। हलांकी कल ही झामुमो प्रत्याशी जोबा माझी गुरू जी और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आर्शिवाद ली है, अब देखना है की केंद्रीय नेतृत्व किया निर्ण लेती है।

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