एनएच 320 जी जगन्नाथपुर बायपास सड़क निर्माण करने के लिए हम सभी खूंटकट्टी रैयती बहुफसली सिंचित कृषि जमीन देने के लिए सहमत नहीं

हमारे पूर्वजों ने झाड़,जंगल साफ कर गांव बसाया, खेती करना शुरू किया, इसी जमीन पर हमारा जीवन आश्रित है, और इसी जमीन पर हमारे गांव के अकुशल मजदूरों की जीवन आश्रित है


चाईबासा : हमारे पूर्वजों ने झाड़,जंगल साफ कर गांव बसाया, खेती करना शुरू किया। इसी जमीन पर हमारा जीवन आश्रित है,और इसी जमीन पर हमारे गांव के अकुशल मजदूरों की जीवन आश्रित है।साथ ही इसी गांव के रैयती जमीन और सामुदायिक जमीन पर हमारा संस्कृति,धार्मिक आस्था और दस्तूर स्थापित है। इसीलिए एनएच 320 जी जगन्नाथपुर बायपास सड़क निर्माण करने के लिए हम सभी खूंटकट्टी रैयती बहुफसली सिंचित कृषि जमीन देने के लिए सहमत नहीं है। यह बातें रैयत संघर्ष समन्वय समिति के तत्वाधान में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड पुनरूत्थान अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु ने कहा है।

रैयत और बड़ानंदा पंचायत की मुखिया श्रीमती हीरामनी केराई ने कहा जब जनजातीय मंत्रालय, भारत सरकार ने पांचवीं अनुसूची राज्य और क्षेत्र के लिए भूमि संसाधन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, और झारखंड पांचवीं अनुसूची राज्य है। ऐसे में जगन्नाथपुर बायपास हो या चाईबासा अनुसूचित जिला होने के कारण भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पारदर्शिता के उचित प्रतिकार अधिनियम 2013 प्रभावी है। ऐसे में पारंपरिक ग्राम सभा के लिखित सहमति के बगैर किसी भी बड़े परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। साथ ही पंचायत उपबंध विस्तार अधिनियम(अनुसूचित क्षेत्रों) 1996 भी प्रभावी है।

जिंतुगाड़ा मौजा पोदना साई के रैयत गुरुचरण सिंकू ने कहा सांसद गीता कोड़ा ने हम सभी रैयतों से बिना पूछे ही हमारे बहुफसली सिंचित कृषि भूमि को बाईपास सड़क के नाम पर हवाले कर दिया। एक रैयत के रूप में मेरा निजी विचार है सांसद गीता कोड़ा के साथ हम सभी रैयत जिनका जमीन बायपास सड़क निर्माण के लिए प्रस्तावित है। उनके पाताहातू गांव वाले जमीन के साथ अदला बदली करना चाहते है। ताकि सांसद गीता कोड़ा जगन्नाथपुर बायपास सड़क के नाम पर जमीन दान में दे या कंपनसेशन ले, यह उनके स्वविवेक पर है।

हमलोग को सांसद गीता कोड़ा उनके पाता हातू का जमीन दे दे। कयोंकि हमलोग जमीन के जमीन अदला बदली कर सकते है। पर बायपास सड़क निर्माण के नाम पर अपना बहुफसली सिंचित कृषि भूमि देने के लिए सहमत नहीं है। रैयत संघर्ष समन्वय समिति के सलाहकार जगदीश चंद्र सिंकू ने विस्तार से जमीन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा इस रैयती जमीन पर हमारा कानूनी अधिकार है।अलग बात है कि संपति की अधिकार को भारत का संविधान के मौलिक अधिकार से संशोधित किया गया।

बैठक को रैयत संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष सुमंत ज्योति सिंकु,उपाध्यक्ष विकास केराई, झारखंड पुनरूत्थान अभियान के जिला संयोजक पूर्व बैंक कर्मी अमृत मांझी, सेवा निवृत प्रवर्तन विभाग के अधिकारी रहे बुधराम सिंकु, सेवा निवृत स्टेट बैंक मैनेजर बागुन सिंकु, सेवा निवृत शिक्षक बिरसा सिंकु, सेवा निवृत्त शिक्षक महेंद्र सिंकु, सेवा निवृत पोस्ट मास्टर योगेंद्र सिंकु, रैयत मंगल सिंह केराई, रैयत बबलू बोबौंगा, रैयत राजेश लागूरी, विश्वनाथ बोबोंगा, विनीत लगूरी, रविंद्र लगुरी, गंगाराम सिंकु, मथुरा सिंकु, सुरेश सिंकु, संतोष सिंकू, अरिल सिंकु सहित अन्य रैयत ने संबोधित किया।

बैठक में बड़ा नन्दा, कंसलपोस, मैरामसाई, जिंतुगाड़ा, डेयापोसी गांव के रैयत उपस्थित थे।

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