बिना पंखे में रोजेदार शिक्षक और छात्रों को हो रही भारी असुविधा
चाईबासा/संतोष वर्मा : जैंतगढ़ आस पास क्षेत्र में पारा 40 डिग्री पार कर चुका है।गर्मी के मारे लोगो का बुरा हाल हैै। बच्चे शिक्षक लू और डी हाइड्रेशन के शिकार हो रहे है। ऐसे में पंद्रह घंटे के रोजेदार शिक्षको और बच्ची को 9 से 3 तक स्कूल में रखना शोषण से कम नही। कई स्कूलों तक नही पहुंची है बिजली। भले ही झारखंड शिक्षा विभाग शत प्रतिशत स्कूलों में विद्युतीकरण का दावा करती है। पर धरातल में ये सफेद हाथी ही है।
सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र तो छोड़ मुख्य सड़क के किनारे के स्कूल भी बिजली के अभाव का रोना रो रहे है। जहां बिजली है भी तो हालत जर्जर है। कुछ में मात्र ऑफिस तो कुछ में आधे अधूरे कमरों में बेतरतीब बिजली तार झूलते है। हद तो ये है जहा आम चुनाव के बूथ है वहा भी बिजली सुचारू नही है। एक शिक्षक ने नाम नही छपने की शर्त पर बताया हर स्कूल को पैसा मिला है। कई बार मरममति और विद्युतीकरण का पैसा आता है पर शिक्षक भी अब ठेकेदार बन गए है। आधी मेरी, आधी तेरी जो बची वह स्कूल की यही कहावत अब चरितार्थ हो रही है।
विकास मद के साथ मध्याह्न भोजन योजना भी चारा गाह वन गया है। स्वतंत्र एजेंसी द्वारा विकास मद और मद्यहान भोजन का धरातल में गहन पड़ताल किया है तो कई गुरुजी बे आबरू हो जायेंगे। कही बच्चों के निवाला मे डाका है तो कही विकास मद में भारी लूट मची है। आखिर समाज के सबसे सभ्य व्यक्तित्व के मालिक शिक्षक क्यों अपनी मिट्टी पलीद करने पर तुले हुए है। ये एक अबूझ पहेली बनी हुई है।
