विधान सभा में विधायकों ने मध्याह्न भोजन में केंद्रीकृत किचन को बंद कर पुरानी व्यवस्था की मांग की एवं मंच ने उपायुक्त से मांग किया


चाईबासा : भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक विनोद सिंह एवं 20 दिसम्बर को खरसवाँ विधायक दशरथ गगराई ने मध्याह्न भोजन में किद्रीकृत किचन से हो रही समस्याओं को विधान सभा के वर्तमान सत्र में  उठाया और राज्य सरकार से मांग किया कि किद्रीकृत किचन योजना को बंद कर पुरानी व्यवस्था लागू किया जाए।
साथ ही, आज दिनांक 20 दिसम्बर 2023 को खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिलकर मध्याह्न भोजन में किद्रीकृत किचन योजना को बंद कर पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग किया। मांग पत्र संलग्न। उपायुक्त को प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मंच द्वारा सितंबर-नवम्बर 2023 में ज़िला के चार प्रखंडों (सदर, खुंटपानी, तांतनगर, झिंकपानी)  के 23 पंचायतों के 42 विद्यालयों में केंद्रीकृत किचन से मिल रहे मध्याह्न भोजन का सर्वेक्षण किया गया है। सर्वेक्षण के नतीजे चौकने वाले हैं। 

सर्वेक्षण में सभी 42 विद्यालयों के छात्रों एवं 92% विद्यालयों के शिक्षकों ने कहा कि पहले जो विद्यालय में ही रसोईये द्वारा मध्याह्न भोजन बनता था, उसकी गुणवत्ता व स्वाद सेंट्रल किचन से मिल रहे भोजन से बेहतर था। 90% विद्यालयों के शिक्षकों ने यह भी कहा कि अभी की तुलना में बच्चे पहले ज़्यादा खाते थे, जब विद्यालय में ही खाना बनता था। अब खराब गुणवत्ता और स्वाद पसंद ना आने के कारण बच्चों द्वारा भोजन फेंकना आम बात हो गयी है।सर्वेक्षण के दौरान बच्चो, शिक्षकों व रसोइयाओं ने कहा कि पहले कि जब विद्यालय में भोजन बनता था, तब गर्म, ताज़ा और स्वादिष्ट भोजन मिलता था। हरा साग-सब्जी भी मिलता था। रोज़ दाल मिलती थी। 

लेकिन सेंट्रल किचन के खाने का स्वाद घर के खाने से बिलकुल अलग होता है। सर्दी में खाना जल्दी ठंडा हो जाता है और गर्मी में खराब। हरा साग कभी नहीं मिलता है। सब्जी में केवल आलू-पटल रहता है, जिसका बड़ा-बड़ा टुकड़ा रहता है जो कभी-कभी पूरा सीझता भी नहीं है। दाल पानी-जैसी  रहती  है और कई बार तो पूरी उबली भी नहीं होती। चावल और दाल कई बार खराब हो जाता है।

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि केंद्रीकृत किचन से बच्चों को पर्याप्त पोषणयुक्त, गुणवततापूर्ण, ताज़ा और स्वादिष्ट भोजन नहीं मिल रहा है। NFHS-5 के अनुसार ज़िले के पांच वर्ष के कम उम्र के 62% बच्चे कुपोषित है। ऐसे परिस्थिति में बच्चों को खराब मध्याह्न भोजन मिलना अन्याय है। मध्याह्न भोजन में बच्चो को सही पोषणयुक्त भोजन न मिलना राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन भी है। बिना लहसन-प्याज़ का खाना खिलाकर बच्चो, खास कर के आदिवासी बच्चो, पर एक खास धार्मिक सोच थोपा जा रहा है जो संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। साथ ही, केंद्रीकृत किचन व्यवस्था के कारण मध्याह्न भोजन के लिए पूर्व की तरह स्थानीय किसानों से सब्जी खरीदना भी बंद हो गया है।

मंच ने उपायुक्त से मांग किया कि तुरंत ज़िले के चारो प्रखंडों में मध्याह्न भोजन में केंद्रीकृत किचन व्यवस्था को बंद कर पूर्व की तरह विद्यालय में ही खाना बनाने की व्यवस्था को लागू की जाए। 

प्रतिनिधिमंडल में विनीता सुंडी, डोबरो बारी, हेलेन सुंडी, जयंती मेलगंडी, नारायण कंडेयग, रमेश जेराई व रेयांस समड शामिल थे।

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