चाईबासा। हेमंत सरकार का (4) चार वर्ष पूराग होने को है इसी उपलक्ष्य पर में सरकार ने सरकार आपके द्वार के कार्यक्रम के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों, प्रखंडों में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है और लोगों को यह दिखाने के कोशिश कि जा रही हैं कि सरकार ने आम जनमानस के समस्याओं का समाधान कर रही है। लेकिन धरातल पर इसका हकीकत कुछ और बयां कर रही है। झामुमो की सरकार सत्ता में आने से पूर्व किये गए वादों पर खरा नहीं उतर पाई और अपने ही किए वादों के खिलाफ काम कर रही हैं।
उक्त बातें आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के सिंहभूम लोकसभा प्रभारी सह युवा नेता रामहरि गोप ने कहा कि सरकार में आते ही युवाओं को (5) पाँच लाख सरकारी नौकरी, नौकरी नहीं मिलने पर (5) पाँच से (7) सात हजार तक बेरोजगारी भत्ता, प्रत्येक गरीब परिवारों को 72 हजार रुपया वार्षिक आय, प्रत्येक शहीदों के परिवार का एक-एक सदस्यों को सरकारी नौकरी, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का आरक्षण क्रमशः 27,12, 28 फीसदी आरक्षण बढ़ाई जाएगी और आदिवासी मुलनिवासी के संवैधानिक अधिकारों जैसा पेसा, वन अधिकार अधिनियम, समता जजमेंट, 5वी अनुसूची को लागू करना आदि घोषणा की थी लेकिन झामुमो सरकार में आने के बाद अपने घोषणा पत्र का एक भी काम नहीं कर पाई है यही सारी नाकामियों को छुपाने के लिए सरकार प्रदेश के विभिन्न जिलों और प्रखंडों में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम कर रही है जो झारखंडी जनता के साथ धोखा है।
नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार झारखंड भारत का दूसरा सबसे गरीब राज्य है जबकि झारखंड प्राकृतिक संपदा से धनी राज्य है। बावजूद कि पूरे भारत के 40 फीसदी प्राकृतिक संपदा झारखंड में उपलब्ध है। यह झारखंड सरकार की शासन चलाने की नाकामियों का जीता जागता उदाहरण है। हमारे पूर्वजों ने जिस उम्मीदों से अलग झारखंड की मांग की थी वह कहीं भी नजर नहीं आता। आज भी यहाँ के मूलनिवासी आदिवासी अपनी जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति पहचान और अस्तित्व के लिए संघर्षरत है।
झारखंड के 15 जिले 5वी अनुसूचित क्षेत्र में आता है और सीएनटी, एसपीटी कानून भी यहां मौजूद हैं बावजूद आज सबसे ज्यादा जमीन आदिवासी और मुलनिवासी से छीना जा रहा है साथ ही विस्थापन का भी शिकार बन रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार के पास यहां के स्थानीय मूल निवासियों के लिए कोई नीति और स्थायी समाधान नहीं है सिर्फ यहां के लाखों लोगों को दिग्भ्रमित कर और अपने अधिकारों से वंचित कर वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
