शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर बिना अनुमति और दर्जनों अवैध और फर्जी स्कूल हो रहे हैं संचालित

* सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले अवैध और फर्जी स्कूलों पर शिक्षा विभाग मेहरबान

* प्ले, नर्सरी से लेकर मध्य और हाई स्कूल तक के दर्जनों अवैध स्कूल हो रहे हैं संचालित, कोचिंग सेंटर का नाम देकर किया जाता है गुमराह

* बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़, सुरक्षा मानको का भी उल्लंघन, अवैध फर्जी स्कूलों से प्रतिमाह होती है लाखों की वसूली, अवैध कमाई

* चिड़ियाघर नुमा स्थानो, घरों, फ्लैट, अपार्टमेंट में शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन कर अवैध रूप से संचालित हो रही है कई स्कूले

फोटो _ 

चाईबासा : कोल्हान प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा सहित पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर दर्जनों फर्जी और अवैध स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिसमें कई बदनाम, चर्चित और नामी स्कूल भी शामिल है। शिक्षा माफियाओ द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर, बच्चों के सुरक्षा , गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, सरकार और शिक्षा विभाग के स्कूलों के संचालन को लेकर जारी गाइडलाइन और
मानको को दरकिनार कर  वैसे स्कूलों को संचालित किया जा रहा है, और लाखों रुपया बच्चों के नामांकन, फीस आदि के नाम पर वसूला जाता है। 

इन अवैध और फर्जी स्कूलों में प्रतिमाह लाखों का वारा न्यारा होता है। जिलेभर में दर्जनो कथित स्कूल, कॉलेज बिना मान्यता एवं शिक्षा का अधिकार का उल्लंघन कर चलाया जा रहा है। जिसमें कई बदनाम और चर्चित स्कूल भी शामिल है। शिक्षा माफियाओं का एक बड़ा नेटवर्क अवैध और फर्जी स्कूलों को संचालित कर रहा है। जिसे शिक्षा विभाग का भी संरक्षण मिल रहा है, यही कारण है कि इन अवैध और फर्जी स्कूलों, बिना अनुमति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन कर चलने वाले स्कूलों और उनके संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। 

वहीं अवैध और फर्जी स्कूलों से बच्चों का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। चाईबासा जिले में दर्जनो स्कूल बिना अनुमति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर अवैध रूप से संचालित हो रहा है। चिड़ियाघर नुमा स्थानो ,घरों और फ्लैट आदि में सिर्फ मुनाफाखोरी के लिए और धन उगाही करने के लिए बच्चों के सुरक्षा को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर अवैध स्कूल संचालित हो रहा है। अभिभावकों और बच्चों से नामांकन एवं ट्यूशन फीस, मासिक फीस के नाम पर प्रतिमाह लाखों रुपया की अवैध कमाई और अवैध उगाही भी किया जा रहा है। 

इन अवैध और फर्जी स्कूलों, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले स्कूलों पर शिक्षा विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसा नहीं है कि बिना अनुमति और अवैध रूप से चलने वाले स्कूलों, शिक्षा का अधिकार का अधिनियम कर चिड़ियाघरों नुमा स्थानो ,घरों ,फ्लैट आदि स्थानों पर नर्सरी से लेकर एक, दो, तीन, चार, पांच, कक्षा और उससे भी ऊपर के वर्ग के स्कूलों का संचालन हो रहा है। नर्सरी और प्ले स्कूल के नाम पर भी अवैध और फर्जी स्कूल बिना अनुमति और शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन कर चल रहा है। जिसमें बच्चों की सुरक्षा मानको, प्रशिक्षित शिक्षकों और सुविधाओं का सहित गाइडलाइन का घोर उल्लंघन किया जा रहा है। हालांकि नर्सरी, प्ले स्कूल से लेकर मध्य और हाई स्कूल तक के अवैध और बिना अनुमति वाले स्कूलों, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले स्कूलों को लेकर पूर्व में भी प्रमुखता से खबरें प्रकाशित होती रही है। 

खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा वैसे स्कूलों की जांच भी कराई गई थी। इसमें कई अवैध और फर्जी स्कूल, बिना अनुमति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन और मानको का उल्लंघन कर  अवैध रूप से संचालित होने का मामला सामने आया था और दर्जनों फर्जी स्कूलों की सूची बनाई गई थी। हालांकि इन फर्जी और अवैध स्कूलों, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले स्कूलों पर पूर्व के पदाधिकारियो द्वारा मोटी राशि लेकर कोई कार्रवाई नही की गई। इन अवैध और फर्जी स्कूलों पर कार्रवाई के बदले उल्टे संरक्षण ही दिया गया। इन अवैध और फर्जी स्कूलों एवं उनके संचालकों को बचाने के लिए तर्क दिया गया कि इन स्कूलों में बच्चे नामांकित है, पढ़ रहे हैं अगले वर्ष से वैसे स्कूलो पर कार्रवाई होगी। अवैध स्कूलों को बंद कराया जाएगा और बच्चों का नामांकन नहीं होने दिया जाएगा, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिसके कारण ऐसे फर्जी और अवैध स्कूलों के संचालकों और शिक्षा माफियाओ का मनोबल बढ़ा है और वर्तमान में भी बढ़ रहा है। जबकि ऐसे अवैध और फर्जी स्कूल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं साथ ही अभिभावक से भी मोटी राशि नाजायज रूप से वसूली कर रहे हैं और लाखों का वारा न्यारा ,अवैध कमरे इन स्कूलों के माध्यम से कर रहे हैं। सबसे मजेदार बात है कि नर्सरी ,प्ले स्कूल से लेकर मध्य और हाई स्कूल तक के अवैध और बिना अनुमति से संचालित स्कूलों की जब जांच होती है तो इन कथित स्कूलो के बदले कोचिंग सेंटर बना दिया जाता है और इन अवैध और फर्जी स्कूलों को कोचिंग सेंटर का नाम दे दिया जाता है। कोचिंग सेंटर के नाम पर अवैध और फर्जी स्कूलो, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले स्कूलों, बच्चों के सुरक्षा और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले स्कूलों और उनके संचालक को पर कोई कार्रवाई शिक्षा विभाग नहीं कर पा रहा है । 

जबकि विभाग के अधिकारियों को अवैध और फर्जी स्कूलों बिना अनुमति और शिक्षा का अधिकार का अधिनियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों उनके संचालको और इन स्कूलों में होने वाले लाखों की अवैध कमाई की जानकारी है, लेकिन अवैध कमाई में अवैध हिस्सेदारी के कारण इन अवैध और फर्जी स्कूल शिक्षा का अधिकार का अधिनियम का उल्लंघन कर चलने वाले अवैध स्कूलों पर कार्रवाई नहीं होती। हालांकि कोचिंग सेंटर के नाम पर भी अवैध रूप से शिक्षण संस्थान चलाने के लिए नियम और गाइडलाइन है उसका भी उल्लंघन हो रहा है। शिक्षा विभाग में वर्षों से जमें कर्मी और अधिकारी अपने वरीय अधिकारी को गुमराह कर वैसे स्कूलों को और उनके संचालकों को संरक्षण दिया जा रहा हैं।

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