एसपीजी मिशन स्कूलों में शिक्षक बहाली में गड़बड़ी पर उपायुक्त ने गठित की जांच टीम, अपर उपायुक्त को सौंपा गया जांच का जिम्मा

* 15 दिनों में आरोपों की जांच कर मांगी गई रिपोर्ट, स्कूल प्रबंधन एवं संचालकों ने अपने परिचितों परिवार के लोगों को दे दी नौकरी


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : एसपीजी मिशन की ओर से संचालित 2 माध्यमिक एवं 2 हाईस्कूलों में सहायक आचार्यों, आदेशपाल समेत विभिन्न विषयों में हुई शिक्षक बहाली में विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा भारी पैमाने पर गड़बड़ी की गई है और स्कूल प्रबंधन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रिश्तेदारों परिचितों एवं परिवार के लोगों को बहाली की गई है।  

जिसको लेकर झामुमो ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। एसपीजी मिशन स्कूलों में स्कूल प्रबंधन एवं संचालन में शामिल अधिकारियों पर अपने रिश्तेदारों को नौकरी पर रखने के मामले में उपायुक्त ने जांच कमेटी बनाई है। उन्होंने अपर उपायुक्त संतोष कुमार सिन्हा को जांच का जिम्मा सौंपा है। 

अपर उपायुक्त को 15 दिन के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मालूम हो कि अगस्तीन तुबिड नाम के एक अभ्यर्थी ने एसपीजी मिशन बालक-बालिका उच्च विद्यालय एवं एसपीजी मिशन बालक-बालिका मध्य विद्यालयों की प्रबंधन समितियों पर मनमानी तरीके से अपने रिश्तेदारों को बहाली करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से शिकायत की थी और बहाली को रद करने की मांग की थी। 

आरोप लगाया है कि संबंधित विद्यालयों में जितने भी नवनियुक्त शिक्षक बहाल हुए हैं, वो विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव, सदस्य एवं पारिश परिषद के रिश्तेदारों हैं। एसपीजी मिशन बाउवि में छह शिक्षकों, एसपीजी बउवि में आदेशपाल समेत सात शिक्षकों, एसपीजी मिशन बालक मध्य विद्यालय में नौ सहायक आचायाँ एवं एसपीजी मिशन बालिका मध्य विद्यालय में तीन सहायक आचार्य की नियुक्ति मनमानी तरीके से की गयी है। 

* कई मामलों की जांच के लिए बनी जांच कमेटी, जांच भी हुई, रिपोर्ट भी सौंपी गई, मगर नहीं हुई कार्रवाई, कई जांच और जांच पदाधिकारी भी संदिग्ध !

बता दे की चाईबासा शहर में संचालित एसपीजी मिशन स्कूलो के संचालको , प्रबंधन द्वारा शिक्षकों आदेशपालों एवं विभिन्न पदों पर नियुक्ति में भारी गड़बड़ी कर भाई भतीजा बाद करने और  अपने परिवारों ,रिश्तेदारों को गलत तरीके नौकरी दे दिए जाने का मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने और खबर सुर्खियां बनने के बाद , नियुक्ति में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आने पर उपायुक्त द्वारा जांच कमेटी गठित की गई है, जांच का जिम्मा अपर उपायुक्त को दिया गया है । जिले में पूर्व में भी गड़बड़ियां और इस तरह के मामले सामने आने के बाद जांच कमेटी पूरे मामले की जांच के लिए बनाई जाती है। इस बार भी जांच कमेटी बनाई गई है और अपर उपायुक्त को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। 

पूर्व के जांच कमेटी एवं जांच का बुरा हश्र हुआ है। जांच रिपोर्ट ठंडी बस्ती में चली जाती है और आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। शिक्षा विभाग में शिक्षा विभाग एवं परियोजना के कर्मियों, कस्तूरबा विद्यालय के लेखापाल द्वारा नियम विरुध अपनी पत्नी, परिवार, भाई, पिता आदि के नाम पर कंपनी फॉर्म बनाकर सामग्री आपूर्ति, सप्लाई का कार्य किया गया। मामला प्रमुखता से अखबारों में प्रकाशित होने के बाद जांच कमेटी बनाई गई। मामले की जांच भी हुई मगर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह दर्जनों मामलों की जांच कमेटी बनाई गई, जांच हुई जांच रिपोर्ट सौंपी गई। मगर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
          
इसी तरह लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता के सरकारी आवास पर विभाग के लिपिक और उसके सहोदर भाई कथित ठेकेदार द्वारा जबरन अवैध रूप से 10, 11 वर्षों से कब्जा कर रहने का मामला भी सामने आया। 

इस मामले की भी जांच कराई गई एसडीओ सदर को जांच का जिम्मा , सौंपा गया । जांच टीम द्वारा जांच भी की गई रिपोर्ट भी सौंपी गई, रिपोर्ट में गलत तरीके से ठेकेदार ठेकेदार और उसके लिपिक भाई द्वारा अवैध रूप से सहायक अभियंता के लिए बने आवास में वर्षों से अवैध कब्जा कर रहने का मामला सामने आया और 6 माह के अंदर सरकारी आवास खाली करने की अनुशंसा रिपोर्ट में की गई मगर एक वर्ष होने को है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

खास महल लीज की जमीन की अवैध रूप से खरीद बिक्री एवं खास महल लीज की घरेलू उपयोग के नाम पर ली गई जमीन की अवैध रूप से खरीद बिक्री कर व्यावसायिक उपयोग किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री और उपायुक्त से शिकायत की गई थी। आयुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी बनी ।एसडीओ सदर और प्रशिक्षु आईएएस ने खास महल लीज की जमीन की अवैध रूप से खरीद बिक्री मामले की जांच की जांच में घरेलू उपयोग के नाम पर दी गई जमीन का बिना सरकारी और सक्षम पदाधिकारी के अनुमति से खरीद बिक्री होने और व्यावसायिक उपयोग करने का मामला सामने आया, रिपोर्ट भी सौंपी गई मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हालांकि कुछ मामलों में कार्रवाई जरूर हुई है। बाजार से ऊंची कीमत पर कस्तूरबा विद्यालयो में खाद्य सामग्रीयो की खरीद में गड़बड़ी पर पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी नीरजा कुजूर पर उपायुक्त के अनुशंसा पर शिक्षा विभाग झारखंड द्वारा कार्रवाई की गई और उन्हें निलंबित किया गया ,वहीं इसी मामले में बाजार से ऊंची कीमत पर सामग्री की आपूर्ति में जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ सांठ गांठ के आरोपी सप्लायरों आपूर्तिकर्ताओं एवं कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भ्रष्टाचार और गडबरी, अनियमितता आदि के मामला सामने आने के बाद जांच करवा कर दोषियों पर करवाई से प्रशासन के कार्य शैली पर लोगों का भरोसा होगा।                                      

* एसपीजी मिशन संचालक और परिवार करता रहा है मनमानी, करोड़ों अरबों का मुनाफा कमाने के लिए स्कूल के नाम पर आवंटित जमीन पर शॉपिंग मॉल और मार्केट कांप्लेक्स बनाने में लगा प्रबंधन                       

* मार्केट कंपलेक्स, मॉल बनाने के लिए ऐतिहासिक स्कूल भवन को तोड़ा,  रुंगटा ग्रुप द्वारा लाखों की राशि से बने बढ़िया सभागार को भी किया ध्वस्त

एसपीजी मिशन स्कूल प्रबंधक हमेशा से मनमानी करता रहा है एसीपी मिशन बालक उच्च विद्यालय के ऐतिहासिक पुराने भवन को मार्केट कंपलेक्स माल बनाने के लिए तोड़ दिया गया वहीं एस आर रूंगटा ग्रुप द्वारा लगभग 50 लाख की राशि से बने सभागार हाल को भी मिशन परिवार ने करोड़ अर्बन का मुनाफा कमाने के लिए और मार्केट दुकान शॉपिंग मॉल बनाकर मुनाफा कमाने के लिए तुड़वा दिया स्कूल के मैदान में व्यावसायिक उपयोग के लिए मार्केट कांप्लेक्स बनाने माल बनाने का काफी विरोध भी हुआ और मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव आयुक्त को शिकायत की गई जिसके बाद मार्केट कांप्लेक्स बनाने पर रोक लगा दिया गया हालांकि स्कूल प्रबंधन और संचालक लगातार उक्त जमीन इस पर मार्केट कंपलेक्स माल बनाने के लिए प्रशासन द्वारा रोक लगाई गई है उसे पर मार्केट कंपलेक्स और माल बनाने के लिए हर तरह का राजनीतिक हथकंडा एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।

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