अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के तत्वावधान में 10 सूत्री मांगों को लेकर सैकड़ो विस्थापितों राँची तक "पदयात्रा" रैली निकाली


सरायकेला : अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के तत्वावधान में आज 1 अक्टूबर रविवार के दिन  चांडिल डैम के विस्थापितों ने अपना अधिकार के लिए 10 सूत्री मांगों को लेकर  धरना स्थल चांडिल  से राजभवन रांची तक का सैकड़ो विस्थापितों द्वारा विशाल "पदयात्रा" की रैली रवाना हुए।


इस पदयात्रा में शामिल विस्थापितों की आज पहली रात्रि विश्राम नागासेरेंग हाई स्कूल में व्यवस्था की गई है। मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो का कहना है कि आज आंधी, बरसात आदि की विषम परिस्थितियों में भी वृद्ध, महिला, पुरुष, युवा आदियों ने अपने अधिकारों की लड़ाई में सभी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, इसे देखकर विस्थापितों का दर्द इस प्रकार बयां हो रही है कि भले मौत क्यों ना आ जाए, अपना हक व अधिकार पाने के लिए घबराने वाले नहीं है। 

आज सरकारें हमें बेघर कर चैन की नींदें  सो रही है। और हम सभी 40 वर्षों से अपना हक पाने के लिए जूझ रहे हैं। हमारी पदयात्रा की अगली पड़ाव 2 अक्टूबर को रात्रि विश्राम रामपुर नामकुम में एवं 3 अक्टूबर को अंतिम पड़ाव नामकुम से राजभवन रांची को पदयात्रा होगी। इसी बीच 3 अक्टूबर की कार्यक्रमों में 84 मौजा के 116 गांवों के चांडिल डैम विस्थापितों ने अपने अधिकारों के लिए अपनी मांग पत्र के साथ एक दिवसीय सत्याग्रह धरना-प्रदर्शन जाकिर हुसैन पार्क रांची में करेंगे।मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने फिर कहा कि प्रत्येक विकास पुस्तिका में विस्तापित परिवार को सरकारी नौकरी दिया जाए अथवा प्रत्येक विस्थापित परिवार के लिए 60 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश के तर्ज पर चाण्डिल डैम विस्थापितों को आज के महंगाई अनुसार मुआवजा दिया जाए। 

फिर उसने कहा कि प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार को 25 डिसमिल जमीन दिया जाना था, जो अब तक किसी को नहीं मिला, जिसे जल्द पूरा किया जाए । उन्होंने आगे कहा कि हमारी मांगों में यह भी शामिल है कि 18 वर्ष पूरा होने वाले सभी विस्थापितों के नाम विकास पुस्तिका निर्गत किया जाए। अंत में कहा कि हमारी मांगों में विस्थापित एवं सरकार के बीच सांमजस्य स्थापित हेतु समन्वय  समिति परियोजना का गठन किया जाए एवं उस समिति में अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच को भी रखा जाए।

इस  प्रकार अपनी मांगों को रखने के लिए एवं कार्यक्रम को सफल बनाने एवं आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से राजीव महतो, अरुण धीवर, विवेक सिंह बाबू, गीता रानी महतो, मंजू गोराई, लक्ष्मी महतो, प्रथमी महतो, मोनिका महतो, सीमंत कुमार महतो, काशीनाथ महतो, सागर  महतो, सीताराम महतो, रामकृष्ण महतो, त्रिलोचन महतो, इंद्रजीत महतो, राजेश महतो, मलखान महतो, सुधांशु महतो, तापस महतो, हाराधन महतो आदि का प्रमुख भूमिका रहा।

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