स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के अंतिम दिन स्वैच्छिक श्रमदान से हुई सरायकेला छऊ कला विरासत स्थल की साफ सफाई


सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत 15 सितंबर से शुरू हुई "स्वच्छता ही सेवा" अभियान के अंतिम दिन खरकाई नदी तट पर स्थित सरायकेला छऊ कला के विरासत भैरव पीठ स्थली का स्वैच्छिक श्रमदान से हुई साफ सफाई।
स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा शुरू होते ही मन में एक बात हिल्लौरे मार रही थी कि पर्यटन स्थल, विरासत स्थल की साफ सफाई कैसे हो?
छऊ को यूनेस्को ने 2010 में ही इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज घोषित किया है। प्रसिद्ध सरायकेला छऊ कला (मार्शल आर्ट) के प्राचीन प्रशिक्षण स्थल के रूप में परिचित भैरव पीठ (विरासत) स्थली की साफ सफाई हेतु स्वैच्छिक श्रमदान के लिए ठाना। और एक मित्र को साथ लिए भैरव पीठ स्थली (विरासत स्थल) की और निकला।

पुराना बस स्टैंड से पोस्ट ऑफिस रोड होते हुए गंतव्य की ओर जा रहा था कि रास्ते में एक पुस्तकालय मिला। जहां लोगों ने बताया कि इस पुस्तकालय का नाम राजकीय अनुमंडलीय पुस्तकालय था जिसका नाम अब साइन बोर्ड में बदल गया। मामला जो भी हो मैं आगे बढ़ा और मल्लिक बांध के पास पूर्व की ओर संकरी रास्ता में गंतव्य की ओर बढ़ा। मित्र के साथ मोटरसाइकिल में जा रहे थे। 


रास्ते में जर्जर सड़क यह एहसास दिला रहा था की रास्ता कठिन है। जो भी हो सड़क की अंतिम छोर तक पहुंचते ही झाड़ जंगल से भरा भैरव पीठ की ओर जाने वाली कच्ची रास्ता नजर नहीं आ रहा था। 

रास्ते में गोपालकों से पूछने पर पता चला कि खेत के रास्ते से वहां पहुंचा जा सकता है।


मैंने निश्चय किया किसी तरह गंतव्य स्थल पहुंचना है। 
मित्र को बाइक के साथ मुख्य सड़क में इंतजार करने की विनती की और मैं पैदल गंतव्य की ओर निकला। बारिश के कारण मिट्टी गीली हो चुकी थी। खेत के पास पानी बह रही थी।


किसी तरह रास्ता तय कर खेत के किनारे-किनारे खरकाई नदी तट पर स्थित भैरव पीठ स्थली (विरासत स्थल) पहुंचा।
वहां कुछ लोग पहले से मौजूद थे जो ताश खेलने में मशगुल थे। मुझे देखते ही वह सकपका गए और भागने की मुड में दिखे।
स्थिति को भांपते हुए कहा मैं खास मकसद से आया हूं। भैरव पीठ स्थली में साफ सफाई करना है। यह बात सुनते ही कुछ लोग साफ-सफाई में जुटने लगे।


जैसे ही मोबाइल से फोटो लेने की कोशिश की कुछ लोग इधर-उधर होने लगे। पूछने पर बताया की फोटो मत लीजिए। परिवार वाले नाराज होंगे।

स्थिति को भांपते हुए मैं झाड़ू लिए साफ सफाई कार्य में जुट गया। उनमें से एक व्यक्ति ने दिल से साफ सफाई कार्य में सहयोग किया। और भैरव पीठ स्थली (विरासत स्थल) की साफ सफाई हुई।


अंत में इनका धन्यवाद करते हुए मैं वापस लौटा। जो भी हो विरासत स्थल की साफ सफाई यादगार रहा।

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