चाईबासा में पान तांती समाज को आदिवासी का दर्जा देने की मांग, निकाली आक्रोश रैली


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : कोल्हान प्रमंडल पान (तांती) समाज कल्याण केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष मोतीलाल दास के नेतृत्व में बुधवार को चाईबासा में एक रैली निकालकर अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की गई. पान तांती समाज के लोगों ने कहा कि हमारे समाज के साथ सरकार भेदभाव कर रही है. 

वर्षों से आदिवासी का दर्जा मिलना चाहिए जो कि अब तक हमें नहीं मिला है. चाईबासा के मुख्य सड़क पर रैली निकालकर अपने हक अधिकार की मांग शासन से की. अविभाजित सिंहभूम (कोल्हान प्रमंडल) जिला में निवासरत पान जाति जिनके भू-अभिलेख के जाति स्तम्भ में पान का पर्याय (उप जाति) तांती दर्ज है, इसे अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत कर सामाजिक न्याय दिया जाये. 


राज्य अर्न्तगत अविभाजित सिंहभूम जिला में निवासरत मूल निवासी पान जाति सैकड़ों वर्षों से निवास करते आ रहे हैं. झारखंड की जाति इतिहास के संबंध में एचएच रिजले द्वारा लिखित ट्राइबल एंड कास्ट ऑफ बंगाल पुस्तक के भाग-2 में पृष्ठ स0-157 में उल्लेख किया गया है कि सिंहभूम में पान जाति, तांती के नाम से भी जानी जाती है. पृष्ठ सं0 304 एवं 305 में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि सिंहभूम में हुए अनुसूचित जनजाति के दर्जा में है. 

सिंहभूम में निवासरत निम्न स्तरीय सामाजिक आर्थिक, शैक्षणिक स्तर से पिछड़े पान जाति को सरकार के अधिसूचना 29 अक्टूबर 1956 द्वारा बिहार (अब झारखण्ड) राज्य में विशेष आरक्षण प्रावधान के तहत अनुसूचित जाति में स्थान दिया गया है. लेकिन वर्तमान सरकार में इसे अलग कर दिया गया है. 
सरकार से मांग है कि हमें अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करे. हरिश चंद्र भंज, मोतीलाल दास, जगदीश दास, उमाकांत दास, चंद्र शेखर दास जितेंद्र दास, सपन दास, चूलेन, अशोक पात्रो, प्रमोद भंज, कार्तिक पात्रो, रसमणि दशभया, सीता देवी.

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