सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : बंदीराम खरसांवा स्थित मॉडल महाविद्यालय में आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह में गुरु शिष्य ने उन्हें याद किया। और हुई संगोष्ठी में उक्त महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ उमाशंकर सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की साहित्य आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने प्रेमचंद के उपन्यास, कहानियों के महत्व को बयां किया।
इससे पहले सहायक प्रोफेसर नंदकिशोर सहाय ने प्रेमचंद की जीवनी पर प्रकाश डाला। सहायक प्रोफेसर सविता सहाय, सहायक प्रोफेसर अमित ने भी विचार व्यक्त किया। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष तथा सहायक प्रोफेसर डॉ वैष्णव चरण मुखी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद को हिंदी कथा साहित्य का शिखर पुरुष माना जाता है। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 को लमही गावँ, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
उन्होंने प्रेमचंद के उपन्यास, कहानीयों की प्रासंगिकता पर चर्चा की। और उनके कृतित्व को याद किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी विचार रखा। संजय महतो, प्रियंका ने क्रमशः दो बैलों की कथा, पंच परमेश्वर कहानी का सारांश प्रस्तुत की। संगोष्ठी के बाद भी छात्र-छात्राओं में दिनभर मुंशी प्रेमचंद के कृतित्व पर चर्चा होती रही।


