चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : अखिल झारखण्ड प्राथमिक शिक्षक संघ (अजप्टा) का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष महेश सिंह एवं महासचिव उपेंद्र सिंह के नेतृत्व में उपायुक्त सह जिला शिक्षा स्थापना समिति के अध्यक्ष अनन्य मित्तल एवं जिला शिक्षा अधीक्षक अभय कुमार शील से मुलाकात की। उन्होनें उभय पदाधिकारियों को जिला शिक्षा विभाग द्वारा जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात को आधार बनाकर अतिरिक्त ईकाई दिखाकर हटाए जानेवाले सूची में व्याप्त खामियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। संघ के पदाधिकारियों का कहना था कि जिस आंकड़े को आधार बनाकर शिक्षकों को हटाया जा रहा है वह एक बर्ष पुराना है। यही कारण है कि उक्त सूची में वैसे शिक्षक-शिक्षिकाओं का नाम भी शामिल है जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मजेदार बात ये कि उक्त सूची को जिला शिक्षा अधीक्षक ने 27 जुलाई 2023 को हस्ताक्षरित किया है।
ऐसे में क्या विभाग सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी तबादला करेगा?
यही नहीं अतिरिक्त ईकाई के नाम पर जिस विद्यालय से शिक्षकों को हटाया जा रहा है उसी विद्यालय में स्थानांतरण के लिए बने पोर्टल पर रिक्ति भी दिखाई जा रही है। मसलन शहर के बेहतरीन विद्यालय में शुमार टाटा कॉलेज कॉलोनी मध्य विद्यालय में वर्ग एक से वर्ग पाँच में दो शिक्षक क्रमशः विद्यालय के प्रभारी उपेंद्र सिंह एवं सविता कुंकल को कुल छात्र के अनुपात में अधिक शिक्षक होने के नाते विद्यालय में वरीय शिक्षक होने के कारण हटाया जा रहा है जबकि उसी विद्यालय में स्थानांतरण पोर्टल पर एक पद रिक्त दिखाया जा रहा है। उसी तरह प्राथमिक विद्यालय कुम्हारटोली में मात्र एक शिक्षिका सरिता विरुवा पदस्थापित है और उसे भी अतिरिक्त ईकाई दिखाकर हटाया जा रहा है तो क्या यह विद्यालय बन्द हो जाएगा?
संघ के अध्यक्ष महेश सिंह ने बताया कि ऐसे अनेकों विसंगतियां हैं जिसका निराकरण किए वगैर अगर स्थानांतरण प्रक्रिया को अंजाम दिया गया तो इससे और विसंगति उत्पन्न हो जाएगी और बहुत सारे विद्यालय तो शिक्षक के आभाव में बन्द हो जाएंगे। एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की लोकप्रिय सरकार बंद विद्यालयों को खोलना चाह रही है वहीं पीरामल फाउंडेशन जैसे गैर सरकारी संगठन शिक्षा विभाग का बेड़ा गर्क कर सरकार को बदनाम करने पर तुले हुए हैं।
अजप्टा के प्रतिनिधियों ने द्वय पदाधिकारीयों से विभिन्न ग्रेडों में प्रोन्नति देने का मामला भी उठाया। जिला शिक्षा अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सितंबर या अक्तुबर माह तक स्थापित नियमावली का पालन करते हुए अहर्ताधारी शिक्षकों को ग्रेड-4 में प्रोन्नति दे दी जाएगी। विभाग ने इस दिशा में कार्य करना प्रारंभ कर दिया है तथा नियुक्ति तिथि से जिस तरह ग्रेड-1 एवं ग्रेड-2 देने का कार्य पूरा किया गया है उसी तरह यह कार्य को भी ससमय पूर्ण कर लिया जाएगा। ग्रेड-7 में प्रोन्नति के मामले पर जिला शिक्षा अधीक्षक ने निदेशालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त होने पर ही कार्यवाई की बात कही।
महासचिव उपेंद्र सिंह ने जिला शिक्षा अधीक्षक का ध्यान विभिन्न प्रखण्डों में शिक्षकों के वेतन भुगतान में हो रहे विलंब की ओर आकृष्ट कराया। उन्होने बताया कि जिले के कई प्रखण्डों में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के मनमानी के कारण शिक्षकों के वेतन भुगतान में विलंब हो रहा है। कुछ प्रखण्ड ऐसे हैं (मसलन कुमारडुंगी एवं हाटगम्हरिया) जहाँ महीने के 15 तारीख तक वेतन भुगतान हो पाता है जो अत्यंत आपत्तिजनक है। इन प्रखण्डों के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी उपस्थिति विवरणी एवं बायोमेट्रिक् उपस्थिति की जाँच का बहाना बनाकर जानबूझकर शिक्षकों को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होने कहा कि अगर उक्त दस्तावेजों के अवलोकन में इतना ही समय लगता है तो सदर प्रखण्ड का वेतन भुगतान महीने की आखरी तारीख या अगले माह की पहली तारीख को कैसे हो जा रहा है?
जिला शिक्षा अधीक्षक ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की तथा संघ को आश्वस्त किया कि वे अपने स्तर से सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी को महीने के 1 से 2 तारीख के बीच वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहेंगे। अगर कोई प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बिना कारण बताए शिक्षकों के वेतन भुगतान में विलंब करता है तो उनपर आवश्यक कारवाई की जाएगी।
उपायुक्त से बार्ता में महासचिव उपेंद्र सिंह ने जिले के विभिन्न प्रखण्डों में शिक्षकों द्वारा सामान्य भविष्य निधि से निकासी में आ रही कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। उन्होनें बताया कि पूर्व में प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के द्वारा ही उक्त निकासी को अंजाम दिया जाता था परंतु हाल में जिला शिक्षा अधीक्षक के एक पत्र ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को परेशानी में डाल दिया है। उक्त पत्र के अनुसार अब शिक्षकों को सामान्य भविष्य निधि से निकासी के लिए प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी से अपने आवेदन को अग्रसारित कराकर जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में जमा करना होता है। उक्त आवेदन पर जिला शिक्षा अधीक्षक उचित निर्णय लेकर आदेश निर्गत करते हैं तब जाकर कहीं शिक्षकों को भुगतान हो पाता है। महासचिव ने बताया कि इस प्रक्रिया को पूर्ण होने में लगभग दस से पंद्रह दिन लग जा रहे हैं जो पहले मात्र एक या दो दिन में पूरा हो जाता था। शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक को पुरानी व्यवस्था कायम करने अथवा क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी के आदेश पर सामान्य भविष्य निधि से निकासी का कार्य पूरा कराने का आदेश दिया।
इससे पूर्व अखिल झारखण्ड प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से संघ के वरीय सदस्य सह नगरपालिका बंगला मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक असीम कुमार सिंह ने उपायुक्त अनन्य मित्तल को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों *भूमि सम्मान* प्राप्त कर जिला का मान बढ़ाने के लिए पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।
उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षक से मिलनेवाले अजप्टा के प्रतिनिधिमंडल में संघ के अध्यक्ष, महासचिव के अलावे राज्य संघ के संयुक्त सचिव उपेंद्र कुमार, नगरपालिका बंगला मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक असीम कुमार सिंह, नोवामुंडी से राकेश कुमार श्रीवास्तव, मनोहरपुर से राजेंद्र नेवार आदि उपस्थित थे।

