बाढ़ से मिट्टी कटाव नहीं रुकी तो विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ की धरती खरकाई नदी में समा जाएगी


 सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) :  जिला के खरकाई नदी से बालू उठाव के कारण पिछले एक दशक से बाढ़ से नदी तट क्षेत्र में मिट्टी कटाव जारी है और यही हाल रहा तो अगले दशक तक विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ कला की धरती खरकाई नदी में समा जाएगा।


सूत्र बताते हैं कि पहले भी नदी में बाढ़ आती थी। नदी में बालू रहने के कारण पानी सक्रियता से निकल जाती थी। पिछले एक दशक से सरायकेला शहरी क्षेत्र से गुजरने वाली खरकाई नदी का बालू भी उठाए जाने से नदी की गहराई बढ़ गई। नदी की चौड़ाई भी बढ़ गई। बाढ़ से नदी तट का मिट्टी कटाव और भी बढ़ गया। अगर यही स्थिति रही तो अगले दशक तक विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ की धरती खरकाई नदी में समा जाएगा। 

स्थिति के मद्देनजर नदी और नदी के संसाधनों के संरक्षण जरूरी है। तितिबिलापुल से छोटा टांगरानी तक खरकाई नदी का नजारा देखने से स्पष्ट पता चलेगा कि नदी का रूख (चौड़ाई) सरायकेला शहर की ओर बढ़ रही है। नदी तट क्षेत्र में निर्माणाधीन महिला कॉलेज के निकट पठानमारा पंचायत के छोटा टांगरानी के कुछ क्षेत्र हैं। जबकि पंड्रा पंचायत के कूदरसाई के कुछ क्षेत्र हैं। कूदरसाई से नौरोडीह तक नगर पंचायत क्षेत्र है। बड़ा कंकड़ा पंचायत अंतर्गत नवाडीह गांव के शासन टोला क्षेत्र व गांव क्षेत्र तितिरबिला पुल के निकट है।


इसमे करीब आठ किलो मीटर तक खरकाई नदी तट के क्षेत्र में बाढ़ से नदी का मिट्टी कटाव रोकने की दिशा में पहल आवश्यक है। सूत्र ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छगंगा मिशन के नीति दस्तावेज में नदी तट पर स्थित शहरों के सुरक्षा के लिए नदी संरक्षण योजना का जिक्र है। झारखंड राज्य में सरायकेला खरसावां जिला है। जिला मुख्यालय सरायकेला है। इसमें सन् 1889 में बना नगर निकाय( नगर पालिका) क्षेत्र भी है। राजा-राजवाड समय में सरायकेला प्रिंसली स्टेट हुआ करता था। भले ही सरायकेला सरकार की नजर में प्रसिद्ध बड़ा शहर नहीं हो, मगर विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ कला के लिए सरायकेला प्रसिद्ध है। प्रसिद्ध छऊ कला की शहर सरायकेला की सुरक्षा के लिए मास्टर प्लान समय की मांग है। 


खरकाई नदी तट पर हरित बुनियादी ढांचे या गार्डवाल बना कर बाढ़ से नदी तट के मिट्टी कटाव रोकने की पहल समय की मांग है। मिट्टी कटाव नहीं रोकने की स्थिति में आने वाला समय में सरायकेला शहर खरकाई नदी में समा जाएगा। इसमें दो राय नहीं। संयोग से स्वर्णरेखा नदी तट क्षेत्र में भी यही स्थिति है।

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