चाईबासा : देश में आदिवासियों के साथ हो रहे अत्याचार एवं यूनिफॉर्म सिविल कोड के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में आज यहां पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा शहर में राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद की अगुवाई में भारतीय बेरोजगार मोर्चा, भारतीय विद्यार्थी छात्र प्रकोष्ठ, इंडियन रिटायर्ड मिलिट्री फोर्स , रहस्य की क्रिश्चन मोर्चा व राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ के संयुक्त तत्वधान में जन आक्रोश रैली का प्रदर्शन किया गया।
इस रैली का आगाज पुराना डीसी ऑफिस के सामने से शुरू होकर पोस्ट ऑफिस चौक , गांधी मैदान, व शहीद पार्क होते हुए विरोध के स्वर में नारों की गूंज के साथ पुनः पुराना डीसी ऑफिस के सामने आकर सभा में तब्दील हो गई। ऱैली एवं सभा का नेतृत्व-सागर सिंकु, सुभद्रा बिरुवा, सुरेश चंद्र जेराई, दिलीप बोबोंगा, मनोज चतोम्बा, करन सिंकु व राजेंद्र सिंकु कर रहे थे।
देश शर्मसार और आदिवासी लाचार
सभा के माध्यम से वक्ताओं ने कहा कि आज बिरसा मुंडा और गांधी जी की पवित्र धरती अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, हिंसा व अपराधियों से किस प्रकार ग्रसित है किसी से छुपा हुआ नहीं है। आज अपराधी खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं और सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रहे हैं। क्या यही है अच्छे दिनॽ सरकार देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड के द्वारा आदिवासियों के अस्तित्व को भी खत्म करना चाहती है जो दुर्भाग्य है। संविधान से प्राप्त आदिवासियों के विशेष अधिकार जो आदिवासियों का सुरक्षा कवच है को भी सरकार साजिश के तहत खत्म करना चाहती है को होने नहीं दिया जाएगा।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि देश की पूरे आदिवासी समाज मणिपुर की घटना से आहत और आक्रोशित हैं। दोषी दारों को फांसी की सजा होनी चाहिए तभी आदिवासी समाज को न्याय मिलेगा । जब तक सरकार दोषियों के खिलाफ खड़ी कार्रवाई नहीं करेगी यह लड़ाई भी जारी रहेगी। और इस संयुक्त मोर्चा इन मुद्दों के अलावा कुल 21 मुद्दों पर अपना विरोध जताया।


